नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिले के मदनपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक उमगा पहाड़ पर रोपवे लगाने की योजना वर्षों से चर्चा में है, लेकिन अब तक धरातल पर रोपवे का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व वाले इस स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की लगातार बातें होती रही हैं, बावजूद इसके रोपवे की सुविधा आज भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सपना बनी हुई है।
उमगा पहाड़ पर रोपवे की योजना कोई नई घोषणा नहीं है। वर्ष 2016 में यहां रोपवे लगाने की योजना सामने आई थी। उस समय सीता थापा से उमगा मंदिर तक रोपवे निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात कही गई थी। बाद के वर्षों में भी इस परियोजना को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक स्तर पर मांग उठती रही, लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
2026 में फिर मिला आश्वासन
फरवरी 2026 में आयोजित उमंगेश्वरी महोत्सव के दौरान भी उमगा पहाड़ पर रोपवे लगाने की बात प्रमुखता से उठी। प्रभारी मंत्री ने रोपवे निर्माण के प्रयास की बात कही, जबकि जनप्रतिनिधियों ने भी इसे पर्यटन विकास के लिए जरूरी बताया। रोपवे निर्माण के लिए नई कमेटी बनाए जाने की बात भी सामने आई। लेकिन सवाल यह है कि वर्षों से चली आ रही कवायद आखिर कब जमीन पर उतरेगी। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों पर रोपवे की सुविधा विकसित की जा सकती है, तो उमगा पहाड़ की परियोजना अब तक क्यों लंबित है।
52 मंदिरों की श्रृंखला, फिर भी बुनियादी सुविधाओं की कमी
उमगा पहाड़ धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां सूर्य मंदिर, उमंगेश्वरी मंदिर, गौरी-शंकर मंदिर सहित कई प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं। पहाड़ पर मंदिरों की श्रृंखला और प्राकृतिक सुंदरता इसे पर्यटन की दृष्टि से खास बनाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि रोपवे का निर्माण हो जाए तो बुजुर्ग श्रद्धालुओं, महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को पहाड़ तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
पर्यटन की बड़ी संभावना, इंतजार विकास का
उमगा पहाड़ को विकसित करने की मांग केवल रोपवे तक सीमित नहीं है। सड़क, पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी लंबे समय से महसूस की जा रही है। वर्ष 2026 में उमगा पहाड़ के आसपास इको-फ्रेंडली पार्क विकसित करने की संभावना को लेकर स्थल निरीक्षण भी किया गया है।
ऐसे में रोपवे परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीद फिर बढ़ी है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार गंभीरता से योजना को आगे बढ़ाए और स्पष्ट समयसीमा तय करे तो उमगा पहाड़ को बिहार के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में विकसित किया जा सकता है।
अब घोषणा नहीं, काम शुरू होने का इंतजार
उमगा पहाड़ के विकास को लेकर पिछले एक दशक में कई बार घोषणाएं और आश्वासन सामने आए हैं। वर्ष 2022 की रिपोर्ट में भी यह उल्लेख था कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद रोपवे का निर्माण नहीं हो सका था। अब वर्ष 2026 में एक बार फिर रोपवे निर्माण का मुद्दा सामने आने के बाद स्थानीय लोगों की निगाह सरकार और प्रशासन पर है। उमगा निवासी राकेश सिंह, शशि सिंह, बब्लू सिंह, सूरज सिंह सहित का कहना है कि उमगा की ऐतिहासिक विरासत को केवल महोत्सव और घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय स्थायी पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए।