बेताब अहमद
रांची। झारखंड की राजनीति और संघर्ष के इतिहास की एक मजबूत धुरी, दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की अर्द्धांगिनी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूज्य माता रूपी सोरेन (80 वर्ष) ने बुधवार की देर रात 8:30 बजे अंतिम सांस ली। कुछ समय पहले ही अपने जीवनसाथी को खोने वाली रूपी सोरेन ने आखिरकार प्रकृति के अटल नियम के आगे घुटने टेक दिए और अपने परिवार को सूना छोड़ गईं।
सांस लेने में तकलीफ और उम्र संबंधी अन्य जटिलताओं के कारण उन्हें पिछले महीने रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों, वेंटिलेटर सपोर्ट और टेंपरेरी पेसमेकर लगाए जाने के बावजूद उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। पल्स और ब्लड प्रेशर लगातार गिरने के बाद डॉक्टरों ने सीपीआर देकर बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। निधन के वक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और पूरा परिवार अस्पताल में ही मौजूद था।
नेमरा में पंचतत्व में विलीन होंगी ममता
परिजनों के अनुसार, गुरुवार सुबह 9 बजे तक उनका पार्थिव शरीर रांची के मोरहाबादी स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) ले जाया जाएगा। ठीक यहीं, बरलंगा गांव में दोपहर 12 बजे उनका अंतिम संस्कार उसी पवित्र भूमि पर किया जाएगा, जहां स्वर्गीय शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन हुए थे। सिंगापुर से छोटे पुत्र बसंत सोरेन के भी सुबह तक रांची पहुँचने की उम्मीद है।
पुत्र का मौन और आंसुओं में लिपटा संदेश
माता के जाने से अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरी तरह अभिभावकहीन हो गए हैं। अपनी मां को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर अत्यंत मर्मस्पर्शी शब्दों में लिखा— “बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थी। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गईं।”