बेटे की करतूत ने पिता और भाई को पहुंचाया जेल, ₹2.68 करोड़ के गबन में पूरा परिवार आया लपेटे में
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पूर्वी चंपारण। छोटी सी डिजिटल लापरवाही किसी कंपनी को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है, इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र के संभाजीनगर में देखने को मिला है। उस्मानपुरा स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत एचआर नितिन ने इंटरनल लूपहोल्स (आंतरिक कमियों) का फायदा उठाकर ₹2.68 करोड़ की हेराफेरी को अंजाम दिया। महाराष्ट्र के संभाजीनगर में एक हाई-टेक कॉरपोरेट धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ‘आरएन इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रिकल प्राइवेट लिमिटेड’ के एक शातिर एचआर नितिन ने फर्जी ईमेल और ओटीपी का जाल बुनकर कंपनी के ₹2.68 करोड़ उड़ा लिए। आरोपी नितिन ने बेहद शातिराना अंदाज में अकाउंटेंट का फर्जी ईमेल बनाया, ऑफिस हेड से ओटीपी हासिल किया और वित्तीय अधिकार अपने हाथ में ले लिए।
इसके बाद उसने यह रकम अपने पिता, भाई और बहन समेत रिश्तेदारों के 21 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। पकड़े जाने के डर से शातिर एचआर कंपनी के सर्वर का पूरा डेटा डिलीट कर फरार हो गया। इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर और शिवहर से आरोपी के भाई निकेश और पिता गोपाल सिंह को दबोच लिया है। राजेपुर पुलिस की मदद से दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर महाराष्ट्र ले जाया गया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। राजेपुर थानाध्यक्ष कुमार सौरभ के अनुसार, पूर्वी चंपारण के नरहां पानापुर का रहने वाला नितिन महाराष्ट्र की एक कंपनी में अच्छे पद पर काम कर रहा था, लेकिन ज्यादा पैसे कमाने के लालच ने उसे अपराधी बना दिया। नितिन ने जो जाल बुना, उसमें आज उसका पूरा परिवार फंस चुका है। नितिन ने कंपनी से ₹2.68 करोड़ की ठगी की और उस रकम को अपने पिता, भाई और रिश्तेदारों के खातों में डाल दिया।
हालांकि, जब कंपनी को भनक लगी, तो लोक-लाज और बदनामी के डर से चोरी पकड़े जाने पर आरोपी के पिता बुजुर्ग पिता गोपाल सिंह ने ने ₹7.10 लाख वापस भी किए, लेकिन बाकी रकम न लौटने पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी के पिता और भाई को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इतनी बड़ी रकम चुकाना उनके बस में नहीं था। नतीजा यह हुआ कि मुख्य आरोपी नितिन तो सर्वर डेटा डिलीट करके भाग निकला, लेकिन उसके बूढ़े पिता और भाई निकेश को महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया। राजेपुर थाना क्षेत्र से दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर ले जाया गया है, जहां बेटे के गुनाहों की सजा अब पिता और भाई को भुगतनी पड़ रही है। यह घटना सभी कंपनियों के लिए एक सबक है कि वे अपने वित्तीय लेनदेन और ओटीपी वेरिफिकेशन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतें।