कार्तिक पूर्णिमा पर सजेगा रोहितेश्वर धाम, मुख्यमंत्री के संभावित आगमन से चमकेगा क्षेत्रीय पर्यटन
बेताब अहमद
सासाराम। श्री श्री रोहितेश्वर धाम सेवा समिति ट्रस्ट के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को रोहतास के जिला पदाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें एक मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष कृष्णा सिंह कर रहे थे, जिसमें तोराब नियाजी, राजबली सिंह और अजय देव भी मौजूद रहे। जिला पदाधिकारी महोदय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि इस प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल करते हुए हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल ने आगामी 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा) को रोहितेश्वर धाम में आयोजित होने वाले महोत्सव में बिहार के मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने का आग्रह किया। जिला पदाधिकारी ने मामले में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
अध्यक्ष कृष्णा सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शुरू होगा। समाजसेवी राजबली सिंह ने याद दिलाया कि चेनारी विधायक के नेतृत्व में पहले भी मुख्यमंत्री को आमंत्रण दिया जा चुका है, जिस पर उनकी मौखिक सहमति मिली थी। ट्रस्ट के सदस्यों का मानना है कि मुख्यमंत्री के आने से क्षेत्र के पर्यटन और विकास को एक नई ऊंचाई मिलेगी। डीएम साहब के सकारात्मक सहयोग के आश्वासन से पूरे क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण जगी है। हमें पूरा विश्वास है कि उनके आगमन से रोहितेश्वर धाम का कायाकल्प होगा, पर्यटन बढ़ेगा और क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याएं दूर होंगी।
ट्रस्ट के सदस्य तोराब नियाजी का मानना है कि मुख्यमंत्री के आगमन और प्रशासनिक सक्रियता से पहाड़ी क्षेत्रों के रास्तों, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से कायाकल्प होगा। पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय दुकानदारों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।

बिहार के रोहतास जिले में कैमूर पहाड़ी पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। इतिहास और लोक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र धाम का विशेष महत्व निम्नलिखित रूपों में देखा जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना त्रेतायुग के दौरान हुई थी और इसका ऐतिहासिक संबंध राजा हरिश्चंद्र और उनके पुत्र रोहित (जिनके नाम पर रोहतास पड़ा) से जोड़ा जाता है। मंदिर परिसर में एक अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहती है, जो भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है इस मंदिर की वास्तुकला बेहद खास है। यहाँ गर्भगृह में मुख्य शिवलिंग के साथ-साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी जी की प्रतिमाएं एक ही परिसर में मौजूद हैं इस मंदिर को ‘चौरासन मंदिर’ भी कहा जाता है क्योंकि मुख्य गर्भगृह तक पहुँचने के लिए 84 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इसे ’84 लाख योनियों’ से मुक्ति या मोक्ष के 84 चरणों का प्रतीक माना जाता है।