नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सबौर, भागलपुर। बिहार कृषि विवि (बीएयू), सबौर के वैज्ञानिकों ने आम लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक फूलों से रेड और ब्लू टी तैयार किया है, जो जल्द ही आम लोगों के बीच बाजारों में बिक्री के लिए होगा। बीएयू में वैज्ञानिक इसके बाजार में लाने के लिए प्रक्रिया कर रहे हैं। दरसअसल, कुलपति प्रो. दुनिया राम सिंह के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ थीम के आधार पर ही गुड़हल एवं कुदरूम से रेड टी और अपराजिता फूलों से ब्लू टी तैयार की गई है। जिसकी लागत बाजारों में मिलने वाली ग्रीन टी की अपेक्षा कम होगी। इसका मानवीय परीक्षण भी कुलपति सहित अन्य अधिकारियों ने किया। बीएयू के डिपार्टमेंट ऑफ हार्टीकल्चर द्वारा इसे विकसित किया गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर सह वैज्ञानिक डॉ. अनीत कुमार ने बताया कि दोनों चाय को पूरी तरह प्राकृतिक रूप से तैयार किया गया है।
वेस्ट टू वेल्थ थीम पर वैज्ञानिकों ने ब्लू और रेड टी ईजाद की है। जो ग्रीन टी के उत्पादन से लेकर उसके बाजार मूल्य की अपेक्षा काफी कम होगी। यह उत्पाद पूरे देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा। – प्रो. दुनिया राम सिंह, कुलपति बीएयू। इस टी को बनाने में किसी तरह के बाहरी रासायनिक तत्वों एवं पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। रेड और ब्लू टी में पाए जाने वाले फेनोलिक यौगिक, फ्लेवोनॉयड और एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। बीएयू के वैज्ञानिक ने बताया कि गुड़हल फूल सालों भर प्राप्त होता है, लेकिन कुदरूम और अपराजिता फूल सालों भर नहीं रहते हैं। इसी कारण जब इनका सीजन होगा, तब इन फूलों को संरक्षित कर सुरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए बीएयू परिसर में ही गुड़हल, अपराजिता और कुदरूम के लिए अलग से बाग लगाने की तैयारी है।
वरीय वैज्ञानिक डॉ. अहमर आफताब ने बताया कि बीएयू की तकनीक से फूलों के प्राकृतिक गुणों एवं गुणवत्ता को बेहतर तरीके से संरक्षित करने का प्रयास किया गया है। इसमें फेनोलिक यौगिक, फ्लेवोनॉयड एवं एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये बाजार में मिलने वाली अन्य ग्रीन टी की अपेक्षा काफी कम लागत वाली होगी। वैज्ञानिकों द्वारा ग्रीन टी, ब्लू टी और रेड टी का वैज्ञानिक परीक्षण कर अंतर किया गया है। परीक्षण में रेड और ब्लू टी का ग्रीन टी से काफी बेहतर परिणाम देखने को मिला है। इसकी सेल्फ लाइफ और गुणवत्ता संबंधी जरूरी मानकों पर अध्ययन किया जा रहा है।