नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर बोर्ड का “एक वर्ष का रिपोर्ट कार्ड” जारी किया। इस दौरान उन्होंने बीते वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
मृत्युंजय कुमार झा ने बताया कि वर्ष 2026 की मध्यमा परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या 13,241 से बढ़कर लगभग 24 हजार हो गई है। पिछले आठ वर्षों में संस्कृत शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की संख्या में यह सबसे बड़ी वृद्धि है। संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग किया गया, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच सकारात्मक माहौल बना।
उन्होंने बताया कि पहली बार बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अपनी सरकारी वेबसाइट विकसित की गई, जिसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और परीक्षा परिणाम प्रकाशित किए गए। मध्यमा परीक्षा 2026 का परिणाम मात्र 27 दिनों में जारी किया गया। साथ ही पहली बार पूरक परीक्षा का आयोजन कर असफल विद्यार्थियों को दूसरा अवसर प्रदान किया गया। संस्कृत शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर सर्व शिक्षा अभियान से बोर्ड को जोड़ने की पहल की गई।
शिक्षा मंत्रालय ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए प्रक्रिया को संचालन स्तर पर पहुंचा दिया है।बोर्ड को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति परिसर, बुद्ध मार्ग, पटना में नया कार्यालय आवंटित किया गया है। इसके अलावा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत भारतीय खाद्य निगम से लगभग दो करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है, जिससे आधुनिक कंप्यूटर प्रयोगशालाओं सहित अन्य संसाधनों का विकास किया जाएगा। बोर्ड के 14 कर्मियों को लंबित सेवांत लाभ भी प्रदान किए गए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम का पुनर्गठन किया गया है। भविष्य में 40 मॉडल संस्कृत विद्यालय विकसित किए जाएंगे, जिनमें कंप्यूटर प्रयोगशाला, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुविधाएं, डिजिटल पुस्तकालय और आधुनिक आधारभूत संरचना उपलब्ध होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण, भाषा प्रयोगशाला तथा तकनीक आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
मृत्युंजय कुमार झा ने बताया कि परियोजना इकाई के गठन, अंतरराष्ट्रीय संस्कृत विश्व सम्मेलन, ई-लर्निंग पोर्टल तथा विभिन्न संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और तकनीक-संपन्न बनाया जाएगा।
इस अवसर पर बोर्ड सदस्य दुर्गेश कुमार राय, चन्द्र किशोर कुमार, धनेश्वर प्रसाद कुशवाहा, परीक्षा नियंत्रक उपेन्द्र कुमार तथा बोर्ड के कर्मचारी उपस्थित थे।