दाउदनगर, देव व बारुण में बेहतर होगी स्वास्थ्य सुविधा
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
दाउदनगर (औरंगाबाद)। नबीनगर में स्थित विद्युत उत्पादक कंपनी बीआरबीसीएल के सीएसआर फंड से लगभग साढ़े 23 लाख रुपये खर्च होगा। यह राशि दाउदनगर, देव और बारुण प्रखंड के स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च होगी। इससे स्वास्थ्य सुविधा बेहतर होगी। जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिल सकेगा।
इस संबन्ध में जिला पदाधिकारी द्वारा पांच योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी है। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, दाउदनगर में औषधि भंडार कक्ष, मरीजों एवं परिजनों के बैठने के लिए शेड का निर्माण तथा बारूण एवं देव प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डायग्नोस्टिक भवन में विद्युतीकरण कार्य होना शामिल है। विद्युत कार्यपालक अभियंता, विद्युत भवन प्रमंडल, गया जी भवन निर्माण विभाग द्वारा केवल विद्युतीकरण कार्य के निमित्त प्राक्कलन उपलब्ध कराया गया है।
विद्युत कार्यपालक अभियंता, विद्युत भवन प्रमंडल, गया जी भवन निर्माण विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गए प्राक्कलन के अनुरूप इस मद में उक्त कार्य के लिए योजनाओं का योजनावार प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करते हुए विद्युत कार्यपालक अभियंता, विद्युत भवन प्रमंडल, गया जी भवन निर्माण विभाग को कार्यकारी एजेंसी नियुक्त किया गया है।
पत्र के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बारूण और देव में प्रस्तावित डायग्नोस्टिक भवन का निर्माण कार्य में विद्युतीकरण कार्य के लिए 557217 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, दाउदनगर में प्रस्तावित औषधि भंडार कक्ष का निर्माण कार्य में विद्युतीकरण कार्य पर 515955 रुपये खर्च होना है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, दाउदनगर में मरीजों एवं परिजनों को बैठने के लिए प्रस्तावित शेड का निर्माण कार्य में विद्युतीकरण कार्य पर 91656 रुपये खर्च होना है।
इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, दाउदनगर में प्रस्तावित महिला एवं पुरूष वार्ड का निर्माण तथा चिकित्सक एवं कर्मी कक्ष का निर्माण कार्य में विद्युतीकरण कार्य पर 615705 रुपये खर्च होना है। इन योजनाओं पर कुल 2337750 रुपये खर्च होना है।
क्या होता है सीएसआर फंड
सीएसआर फंड का पूरा नाम ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी’ यानी हिंदी में निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व है। यह कंपनियों द्वारा समाज और पर्यावरण के कल्याण के लिए अपने मुनाफे में से खर्च किया जाने वाला एक निश्चित हिस्सा या फंड होता है।
कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, जिन कंपनियों का नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये, टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये, या शुद्ध लाभ पांच करोड़ रुपये से अधिक हो, उन्हें सीएसआर फंड बनाना अनिवार्य है। ऐसी कंपनियों को अपने पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होता है।