निजी चिकित्सालयों के भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था
डॉ. उपेंद्र कश्यप
दाउदनगर (औरंगाबाद)। अनुमंडल की स्वास्थ्य व्यवस्था निजी चिकित्सालयों के भरोसे है। अनुमंडल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के निर्धारित पद के विरुद्ध 10 से 15 प्रतिशत से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक कभी पदस्थापित नहीं किए गए। कुल 75 बेड वाले में 10 चिकित्सक भी कभी एक साथ पदस्थापित नहीं हुए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भी यही हाल है। दोनों अस्पताल सुविधा और संसाधन का अभाव झेल रहे हैं। ऐसे में लोगों के पास निजी चिकित्सालय पर ही मुख्य भरोसा है।
डॉक्टर्स डे पर संवाददाता ने डॉ. रंजू अस्पताल के डॉ. रंजू, आशादीप के डॉ. विकास कुमार, एके सिंह इमरजेंसी अस्पताल के संचालक डॉ. अरविंद कुमार सिंह और मंटू हॉस्पिटल के डॉ. मंटू कुमार से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। बातचीत के आधार पर कहा जा सकता है कि आम लोगों का विश्वास सरकारी से अधिक निजी अस्पतालों पर है।
डॉ. रंजू महिला रोग विशेषज्ञ हैं तो उनके पति डॉ विनोद कुमार सिंह नेत्र विशेषज्ञ हैं। आगामी 11 जुलाई से उनकी बहू भी बीमार को सेवा उपलब्ध कराएंगी।
इसके अलावा बाजार में डॉ विकास कुमार और उनकी पत्नी डॉक्टर सोनाली गुप्ता माह में दो दिन सेवा देते हैं। जिसमें डॉ. विकास कुमार मूत्र रोग विशेषज्ञ हैं, तो डॉक्टर सोनाली गुप्ता आईवीएफ की विशेषज्ञ है।
एके सिंह इमरजेंसी हॉस्पिटल तमाम आपात सेवाएं उपलब्ध कराती है। जब भी कोई हिंसा की घटना हो, दुर्घटना हो, हर घायल व्यक्ति को सबसे पहले प्राय: इसी अस्पताल में लोग ले जाते हैं। यहां तक कि प्रशासन भी कई बार इस अस्पताल की सेवा लेना सुलभ महसूस करता है।
डॉ. मंटू हॉस्पिटल में भी कई प्रकार के रोगों का इलाज हो रहा है। इस तरह के कई अन्य निजी अस्पताल भी यहां हैं जो लोगों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध करा रहे हैं।
कई बार सामने आता है विवाद
हालांकि कई बार मरीज और अस्पताल के बीच निजी अस्पतालों में जहां अधिक खर्च बता कर विवाद होता है, तो कई बार तमाम सरकारी व निजी अस्पतालों में गलत इलाज को लेकर विवाद खड़ा होता है। मौत की स्थिति में सरकारी या निजी अस्पताल हो दोनों ही जगह हंगामा देखने को मिलता है और आम लोगों का आरोप यही होता है कि इलाज में लापरवाही बरती गई। इन सब के बावजूद अनुमंडल मुख्यालय में कई स्तर पर बड़े अस्पताल, संसाधन, सुविधा और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता है।
कई डॉक्टर अपना निजी क्लीनिक चलाते हैं। जिसमें कई सरकारी चिकित्सक भी शामिल हैं। अनुमंडल की चिकित्सा व्यवस्था इसी के इर्द-गिर्द घूमती है। जरूरत इस बात की है कि सरकार अपने संस्थानों में संसाधन और सुविधा बढ़ाएं। खास कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापन सुनिश्चित करे। वहीं निजी क्षेत्र में भी अस्पतालों में सुधार की व्यापक संभावना है ताकि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो सके।