नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। दानापुर के अनुमंडलीय अस्पताल के पास स्वास्थ्य विभाग के दावों और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती एक झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ बाढ़ में जान गंवाने वाली महिला के शव को परिजनों को खुद गोद में उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ा। पटना जिला के दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल के दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। घटना का वीडियो और तस्वीर सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
दानापुर में शनिवार को बाढ़ के पानी में डूबने से मृत महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के दौरान परिजनों को कथित तौर पर एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि उन्होंने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा और अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन काफी देर इंतजार के बाद भी वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से लाई गई मृत महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए महज आधे किलोमीटर दूर ले जाने के वास्ते कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब आपातकालीन सेवा और अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई एंबुलेंस या शव वाहन नहीं पहुंचा, तो परिजनों को मजबूरन शव को गोद में उठाकर पैदल अस्पताल जाना पड़ा। इस घटना ने दानापुर की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतका की पहचान शाहपुर निवासी बंटी यादव की पत्नी संगीता देवी के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपनी दादी के श्राद्ध कार्य में शामिल होने के लिए दियारा क्षेत्र के हवासपुर गांव गई थी। इसी दौरान बाढ़ के पानी में डूबने से उसकी मौत हो गई। संगीता देवी के डूबने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। परिजनों और स्थानीय लोगों के काफी प्रयास के बाद शव बरामद किया गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भाड़े की नाव से पीपा पुल घाट तक लाया गया।
दियारा पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि मुस्कान कुमार यादव और पूर्व जिला पार्षद ओम प्रकाश यादव ने बताया कि दियारा क्षेत्र के लोग पिछले पांच दिनों से बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। उनका आरोप है कि बाढ़ के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और आपात स्थिति में भी सरकारी स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिल रही है।
अनुमंडलीय अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. निभा मोहन ने बताया कि उनके पास फोन कर शव लाने के लिए एंबुलेंस की मांग नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि यहां 102 एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं है। उनके अनुसार, दो शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद शव वाहन से शवों को पहुंचाने के लिए भेजा गया था। शव को गोद में लेकर अस्पताल जाते परिजनों की तस्वीर सामने आने के बाद दानापुर की स्वास्थ्य और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में एंबुलेंस की मांग और मौके पर उसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति की जांच से ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
कुदरत का कहर और अपनों की बेबसी का इससे दर्दनाक मंजर शायद ही कुछ और हो। दियारा क्षेत्र में बाढ़ के पानी में जान गंवाने वाली संगीता देवी का शव जब पीपा पुल घाट पर पहुंचा, तो परिजनों की उम्मीदें टूट गईं। अस्पताल महज कुछ कदमों की दूरी पर था, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। पति और अन्य परिजनों ने सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय अपनी गोद में ही मृतका का शव उठाया। अंतिम समय में अपनों को इस हाल में देखकर हर आंख नम हो गई। यह सिर्फ एक शव यात्रा नहीं, बल्कि लाचारी की एक मूक दास्तान थी।पीपा पुल घाट से अनुमंडलीय अस्पताल की दूरी 500 मीटर से भी कम है। इतनी कम दूरी के लिए स्ट्रेचर या शव वाहन का न होना अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवा ही को दर्शाता है।