नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। 12 महीने से लंबित मानदेय और राज्यांश राशि के भुगतान की मांग को लेकर शनिवार को धनरूआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध जताया तथा जल्द भुगतान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
आशा फैसिलिटेटर लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि 22 जून से धनरूआ प्रखंड की सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर हैं। इसके बावजूद अब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी के खातों में लंबित राशि नहीं पहुंचती, तब तक कोई भी सरकारी स्वास्थ्य कार्य नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 11 मई को बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के बैनर तले सिविल सर्जन कार्यालय, पटना के समक्ष प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद भुगतान के लिए आवंटन जारी होने और 15 जून तक राशि खाते में भेजने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक किसी भी आशा या फैसिलिटेटर को भुगतान नहीं मिला।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि लगातार 12 महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कई महिलाओं को परिवार का खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। बार-बार आवेदन और प्रदर्शन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।
हड़ताल के चलते प्रखंड में टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच तथा अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होने लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने मानदेय भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।
प्रदर्शन में आशा फैसिलिटेटर लक्ष्मी कुमारी, नीरू कुमारी, रीता कुमारी, सुनीता कुमारी, मालती कुमारी, किरण कुमारी, सुमन रेखा, कुसुम तथा आशा कार्यकर्ता उषा, मंजू, गुड्डी, नीलम, पिंकी, बबीता, सुधा सहित सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं।