निगरानी विभाग ने रंगे हाथ दबोचा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। पटना जिले के धनरूआ अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमाबंदी पुनर्गठन के नाम पर 50 हजार रुपये रिश्वत लेते एक लिपिक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शैलेश कुमार के रूप में हुई है, जो पिछले तीन वर्षों से धनरूआ अंचल में कार्यरत था। कार्रवाई के बाद अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया।
निगरानी विभाग के डीएसपी आसिफ रफीक मेहंदी ने बताया कि रमनीबीघा गांव निवासी राजकुमार, पिता चितरंजन सिंह, ने 17 जून 2026 को निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी पैतृक जमीन की जमाबंदी पुनर्गठन कराने के लिए लिपिक शैलेश कुमार 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा था।
परिवादी राजकुमार ने बताया कि संबंधित राजस्व कर्मचारी शीलू कुमारी द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी किए जाने के बावजूद उनकी फाइल कई दिनों से शैलेश कुमार के पास लंबित रखी गई थी। बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाने और अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने के बाद उन्होंने निगरानी विभाग से शिकायत की।
शिकायत की गोपनीय जांच और सत्यापन में आरोप सही पाए जाने पर निगरानी विभाग ने विशेष धावा दल का गठन किया। सोमवार को पूर्व निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई करते हुए टीम ने धनरूआ अंचल कार्यालय में छापेमारी की। जैसे ही शैलेश कुमार ने परिवादी से 50 हजार रुपये रिश्वत की राशि ली, निगरानी की टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों ने आरोपी के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का कहना था कि संबंधित लिपिक लंबे समय से आम लोगों को विभिन्न कार्यों के नाम पर परेशान कर अवैध वसूली करता था और कई लोग उसकी कार्यशैली से त्रस्त थे।
डीएसपी आसिफ रफीक मेहंदी ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
धनरूआ प्रखंड और अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर यह निगरानी विभाग की अब तक की पांचवीं बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले धनरूआ के तत्कालीन अंचलाधिकारी श्री राम सिंह, एक राजस्व कर्मचारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, धनरूआ थाना के एक दरोगा समेत अन्य कर्मियों को भी अलग-अलग मामलों में निगरानी विभाग रिश्वत लेते गिरफ्तार कर चुकी है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने धनरूआ के प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।