बासगीत पर्चा देकर बसाना भूली सरकार, खरांट के भूमिहीनों का सवाल—पुरानों को नहीं मिला दखल तो नए आवेदनों का क्या भरोसा?
शशि तुलस्यान
मसौढ़ी। सरकार एक ओर भूमिहीन परिवारों को तीन डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने के लिए बसेरा अभियान 2.0 के तहत अंचल कार्यालयों में आवेदन ले रही है, वहीं दूसरी ओर 15 साल पहले बासगीत पर्चा पाने वाले गरीब परिवार आज भी जमीन पर दखल के लिए भटक रहे हैं। कागज पर खाता, खेसरा और रकबा दर्ज है, लेकिन पर्चाधारियों को जमीन पर अब तक कब्जा नहीं मिल सका है। मामला मसौढ़ी प्रखंड के खरांट महादलित टोला का है।
बताया जाता है कि वर्ष 2009-10 में खरांट महादलित टोला के करीब 28 भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा दिया गया था। इनमें संजय मांझी, जितेंद्र मांझी, मदन मांझी, बिनेश्वर मांझी, सोनी मांझी, गोवर्धन मांझी, रामेश्वर मांझी, कुलेश्वरी देवी, मनोज मांझी, गोपी मांझी, सुरेंद्र मांझी, सत्येंद्र मांझी, रामजन्म मांझी, भुवनेश्वर मांझी, सुखदेव मांझी और छोटेलाल मांझी सहित अन्य परिवार शामिल हैं।
पर्चाधारियों का कहना है कि पर्चा मिलने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब अपना आशियाना बनाने के लिए जमीन मिल जाएगी, लेकिन 15 वर्ष गुजर जाने के बाद भी उन्हें जमीन पर दखल-दहानी नहीं कराई गई। मजबूरन ये परिवार सरकारी जमीन पर तंबू और झोपड़ी डालकर किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं।
पर्चाधारियों का कहना है कि जब सरकार वर्षों पहले दिए गए पर्चे के आधार पर उन्हें जमीन उपलब्ध नहीं करा सकी, तो अब बसेरा अभियान 2.0 के तहत लिए जा रहे नए आवेदनों का क्या भरोसा है। उनका आरोप है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जमीन पर अधिकार नहीं मिलने से सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इस मामले को लेकर अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष नागेश्वर पासवान एवं संजय पासवान ने अंचल प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि पर्चाधारियों को जल्द जमीन पर दखल-कब्जा नहीं दिलाया गया तो अंचल कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इधर, अंचलाधिकारी प्रभात रंजन ने बताया कि मामला संज्ञान में है। सभी पर्चाधारियों के लिए जल्द जमीन चिह्नित कर दखल-दहानी की कार्रवाई कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित राजस्व कर्मचारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।