नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
समस्तीपुर। बिहार राज्य के समस्तीपुर में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे का सरायरंजन में अलाइनमेंट बदलने का एनएसयूआई कार्यकर्ता विरोध जता रहे हैं। प्रशासन की कथित उदासीनता और बातचीत से दूरी के बीच, एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का आमरण अनशन सोमवार, 24 अगस्त 2026 को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार पांच दिनों से अन्न जल त्यागने के कारण अनशनकारियों की सेहत तेजी से गिर रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में सोमवार शाम एनएसयूआई और कांग्रेस के सैंकड़ों कार्यकर्ता अनशन स्थल पर एकजुट हुए। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शहर में एक भव्य मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, यह आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप लेगा तथा भूख हड़ताल जारी रहेगी।
छात्र एकता की मिसाल पेश करते हुए जुलूस में एनएसयूआई, आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ता एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। सरकारी बस पड़ाव से शुरू हुआ यह मार्च स्टेडियम मार्केट, हॉस्पिटल गोलंबर और कलेक्ट्रेट का दौरा कर अनशन स्थल पर लौटा, जहां सभी ने एकजुटता के साथ इसका समापन किया।
युवा कांग्रेस नेता अबू तनवीर ने आरोप लगाया है कि रसूखदारों को फायदा पहुँचाने के लिए नियम बदले गए।पुराने और नए सर्वे का हवाला देकर सरकार और प्रशासन पर मिलीभगत का शक जताया गया है।इस फैसले से आम जनता में रोष है और राजनीतिक दलों को सरकार को घेरने का मौका मिल गया है।
अबू तनवीर ने प्रशासन को ललकारते हुए कहा कि जनता के उग्र आंदोलनों के बावजूद गूंगी-बहरी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। एनएसयूआई के जांबाज कार्यकर्ता पिछले 5 दिनों से कलेक्ट्रेट के सामने अड़े हुए और आमरण अनशन कर रहे हैं। उनकी हालत लगातार गंभीर हो रही है, लेकिन तानाशाही प्रशासन को इसकी कोई परवाह नहीं है और वे तमाशा देख रहे हैं।
छात्रों के एक वर्ग द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा उनकी चिंताओं पर अभी तक अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है, विशेषकर सड़क या परियोजना के अलाइनमेंट में संशोधन से जुड़े मुद्दों पर। छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने यह भी चिंता जताई है कि आंदोलनरत छात्रों पर अनावश्यक दबाव बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक संवाद के जरिए उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक प्रयास जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे और अधिक व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।