मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना बनी सहारा, आईजीआईसी में 23 और 24 सितंबर को होगी डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
हाजीपुर। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए संचालित मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत सोमवार को वैशाली जिले के दो बच्चों को बेहतर उपचार के लिए 102 एंबुलेंस से इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (आईजीआईसी), पटना रेफर किया गया। दोनों बच्चे दिल में छेद की जन्मजात बीमारी से पीड़ित हैं। पटना में भर्ती होने के बाद 23 और 24 सितंबर को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा दोनों बच्चों की डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया की जाएगी।
जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के मार्गदर्शन में जिले में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों की लगातार निगरानी की जा रही है। डीएम ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी बच्चा आर्थिक परेशानी या जानकारी के अभाव में इलाज से वंचित न रहे। स्वास्थ्य विभाग और आरबीएसके की टीम को ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार स्क्रीनिंग अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है, ताकि हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ संस्थानों में निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के माध्यम से वैशाली जिले में अब तक 200 से अधिक बच्चों का सफल उपचार कराया जा चुका है। इनमें डिवाइस क्लोजर, ओपन हार्ट सर्जरी सहित विभिन्न जटिल हृदय रोगों से संबंधित उपचार शामिल हैं। उपचार के बाद भी विभाग की ओर से बच्चों का नियमित फॉलोअप किया जाता है और उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है।
सिविल सर्जन डॉ. आर.के. साहू ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को बेहतर जीवन देने में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. कुमार मनोज ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बड़ी राहत है। निजी अस्पतालों में महंगे उपचार का खर्च उठाने में असमर्थ परिवारों के बच्चों को योजना के तहत निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
आरबीएसके की जिला समन्वयक डॉ. शाइस्ता ने बताया कि मोबाइल मेडिकल टीमों द्वारा गांव-गांव जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जांच के दौरान हृदय रोग के लक्षण पाए जाने पर बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजा जाता है। इससे समय रहते बीमारी की पहचान कर बच्चों को उचित उपचार दिलाने में मदद मिल रही है।