नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
रामगढ़। रामगढ़ में उत्क्रमित मध्य विद्यालय महुआरी में शुक्रवार को बच्चों ने लोक आस्था का महापर्व छठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। इस दौरान विद्यार्थियों ने छठ पूजा की पारंपरिक झांकी प्रस्तुत कर पर्व की धार्मिक मान्यताओं और चार दिनों तक चलने वाली व्रत परंपराओं को समझा। बच्चों ने माथे पर दउरा, हाथों में ईख और सूप लेकर विद्यालय परिसर में बनाए गए सरोवर के किनारे पूजा-अर्चना की। इस आयोजन के जरिए उन्हें छठ की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया।
बच्चों ने पारंपरिक तरीके से दिखाई छठ की झांकी
विद्यालय परिसर में छठ घाट जैसा माहौल तैयार किया गया था। बच्चों ने छठ पर्व में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों के साथ पूजा की झांकी प्रस्तुत की। किसी के हाथ में सूप था तो कोई दउरा और ईख लेकर पहुंचा था। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्व की परंपराओं और उसके महत्व को करीब से समझने का अवसर मिला।
वरीय शिक्षक ने बतायी चार दिनों की परंपरा
मौके पर मौजूद वरीय शिक्षक कमलेश शर्मा ने बच्चों को बताया कि छठ सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्राचीन लोकपर्व है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में इसे विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कार्तिक महीने में दीपावली के छह दिन बाद कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक यह पर्व चार दिनों तक चलता है. चैत्र महीने में भी चैती छठ मनाने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि छठ के पहले दिन नहाय-खाय में व्रती पवित्र स्नान कर घर की साफ-सफाई करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन खरना में पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद तैयार कर छठी मैया को अर्पित किया जाता है। इसके बाद करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
डूबते और उगते सूर्य को दिया जाता है अर्घ्य
कमलेश शर्मा ने बताया कि तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के दौरान व्रती नदी और तालाबों के घाटों पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। उन्होंने ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल और अन्य पारंपरिक प्रसाद के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
प्रकृति और अनुशासन का संदेश देता है छठ
शिक्षक ने कहा कि छठ में मूर्ति पूजा के बजाय प्रत्यक्ष रूप से सूर्य और प्रकृति की उपासना की जाती है। सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत मानकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। वहीं, छठी मैया को संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने बच्चों को बताया कि छठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह शुद्धता, अनुशासन, संयम, पारिवारिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। इस अवसर पर विद्यालय के प्रभारी परशुराम राम, शिक्षिका रीटा सिंह, शीला सिंह, शिक्षक आशुतोष कुमार, अजय सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे।