नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। मानसून की पहली फुहार के साथ धनरुआ प्रखंड के तेलहाड़ी गांव में धान की रोपनी का कार्य जोर-शोर से शुरू हो गया है। खेतों में महिला किसान पारंपरिक लोकगीत गाते हुए उत्साह के साथ धान की रोपाई कर रही हैं। कीचड़ से भरे खेतों में भी उनके चेहरे पर मेहनत के साथ खुशी और उम्मीद साफ झलक रही है।
महिलाओं का कहना है कि अच्छी फसल के लिए भगवान इंद्र की कृपा आवश्यक होती है। वे पारंपरिक गीतों के माध्यम से इंद्र देव से पर्याप्त वर्षा और बंपर पैदावार की प्रार्थना कर रही हैं। उनका मानना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इससे खेती में समृद्धि आती है।
गांव में धान रोपनी का अधिकांश कार्य महिलाएं करती हैं, जबकि पुरुष धान के बिचड़े उखाड़कर उनके बंडल तैयार करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि महिलाओं के हाथों से की गई रोपनी से फसल अधिक अच्छी होती है, इसलिए यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है।
हालांकि, पूरे क्षेत्र की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ किसानों के खेतों में बिचड़ा खराब हो जाने से चिंता का माहौल है, जबकि जिन किसानों ने समय पर बिचड़ा तैयार कर लिया था, वे पंपसेट जैसे निजी संसाधनों से सिंचाई कर रोपनी का कार्य आगे बढ़ा रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष मानसून के दौरान खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर धान की रोपाई होने से उत्पादन बेहतर होता है और किसानों को अधिक लाभ मिलता है।
वहीं, पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण उमस भरी गर्मी बनी हुई है। किसान झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि रोपनी का कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने बताया कि मौसम विभाग ने क्षेत्र में जल्द बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।