पूर्वांचल से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक विकास की नई धुरी बनेगा 610 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सिक्स लेन कॉरिडोर
कमल किशोर
औरंगाबाद। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत करीब 3,500 करोड़ रुपयेकी लागत से निर्मित हो रहा वाराणसी-रांची-कोलकाता 610 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सिक्स लेन एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की सड़क संपर्क व्यवस्था को नई पहचान देने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू होकर बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरते हुए झारखंड के रास्ते पश्चिम बंगाल के हावड़ा (उलुबेरिया) तक पहुंचने वाला यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा, बल्कि व्यापार, उद्योग, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और निवेश के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
औरंगाबाद जिले में परियोजना का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है तथा यहां लगभग 25 प्रतिशत कार्य पूराहो चुका है। औरंगाबाद खंड में निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहीपीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेडके अनुसार उपलब्ध सभी स्थलों पर लगातार तेजी से काम किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य परियोजना कोवर्ष 2026 से 2028 के बीच विभिन्न चरणों में पूराकरना है। निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता और निर्धारित सुरक्षा मानकों का विशेष रूप से पालन किया जा रहा है ताकि यह एक्सप्रेसवे लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ साबित हो।

कंपनी के अधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा किभारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की अनुशंसाओं के आधार पर औरंगाबाद जिले में दो अतिरिक्त अंडरपास भी बनाए जा रहे हैं। इससे परियोजना का दायरा और उपयोगिता दोनों बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर भारी वर्षा तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण इंटरचेंज निर्माण प्रभावित हुआ है, लेकिन जहां भूमि उपलब्ध है वहां कार्य लगातार जारी है। प्रशासन के सहयोग से शेष बाधाओं के भी शीघ्र दूर होने की उम्मीद है।
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश केचंदौली जिले के बरौली गांवसे प्रारंभ होकर बिहार और झारखंड के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल केहावड़ा (उलुबेरिया) तक पहुंचेगा। इसके चालू होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक की सड़क यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी। माल परिवहन की गति बढ़ेगी, ईंधन और समय की बचत होगी तथा परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे पूर्वी भारत में औद्योगिक निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को भी नई गति मिलेगी।
औरंगाबाद जिले के लिए यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। यहां स्थापितएनटीपीसीकी दो बड़ी विद्युत परियोजनाओं के कारण भारी औद्योगिक गतिविधियां संचालित होती हैं। एक्सप्रेसवे बनने से इन परियोजनाओं तक मशीनरी, कच्चे माल और अन्य संसाधनों का आवागमन अधिक सुगम होगा। साथ ही स्थानीय उद्यमों, कृषि उत्पादों और छोटे व्यवसायों को राष्ट्रीय बाजारों तक तेज पहुंच मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाला विकास कॉरिडोर है। बेहतर संपर्क व्यवस्था से पर्यटन, कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स को नई ऊर्जा मिलेगी, जबकि हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। गुणवत्ता, सुरक्षा और समयबद्ध निर्माण पर विशेष जोर के साथ आगे बढ़ रही यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच विकास की नई रफ्तार तय करेगी।