नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। जिले के बाढ़ प्रखंड अंतर्गत बराह पंचायत के हसपुरा गांव वार्ड-11 में सरकारी पैसों की बर्बादी का ताजा मामला सामने आया है। यहां करीब 10 लाख रुपये की लागत से बना सामुदायिक भवन महज एक महीने के भीतर ही जवाब दे गया और इसकी छत एक फीट नीचे बैठ गई। मात्र 30 दिनों में छत का धंसना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और मानकों को ताक पर रख दिया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि छत की ढलाई के दौरान कोई भी जिम्मेदार अभियंता मौके पर मौजूद नहीं था। पंचायत सेवक के अभिकर्ता होने की वजह से पूरी प्रक्रिया पर पर्दा डालने की कोशिश की गई, जिससे विभागीय लापरवाही खुलकर सामने आती है।
हालांकि हसपुरा प्रखंड विकास पदाधिकारी ने मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि क्या हर बार ऐसे मामलों में सिर्फ आश्वासन ही मिलेंगे या दोषियों पर सचमुच नकेल कसेगी?
सामुदायिक भवन की छत धंसने के मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ प्रशांत प्रसून ने खुद निर्माण स्थल का निरीक्षण किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी, सामग्री की गुणवत्ता और पंचायत सेवक के अभिकर्ता होने की भूमिका को लेकर कुछ जायज सवाल उठाए हैं। पंचायत सेवक के अभिकर्ता होने के कारण भविष्य में होने वाले कामों की निगरानी कौन करेगा? मुखिया प्रतिनिधि ने क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर दोबारा बनाने का भरोसा तो दिया है, लेकिन इसका वित्तीय भार किस मद से वहन होगा? भवन में दोबारा काम होने पर उसकी अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
बीडीओ प्रशांत प्रसून ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि करीब 10 लाख रुपये की लागत से बने इस भवन की छत गिरने के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चलेगा। ग्रामीणों द्वारा ढलाई और सामग्री को लेकर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। जो भी अधिकारी या कर्मी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस त्वरित रुख से ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी होजाएगा।