नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
वैशाली। देश के विकास की रीढ़ कहे जाने वाले मजदूर एक बार फिर हादसे का शिकार हुए हैं। वैशाली के जलालपुर में बन रहे भव्य 6 लेन पुल की मजबूती में अपना पसीना बहा रहे 6 मजदूरों के लिए गुरुवार की सुबह काली साबित हुई। लॉन्चर शिफ्टिंग के दौरान अचानक हुए हादसे में बिहार और अन्य राज्यों के कई मजदूर मलबे और भारी लोहे के ढांचे के बीच फंस गए।
बिहार के वैशाली जिले से एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा की बड़ी लापरवाही सामने आई है। लालगंज के जलालपुर में ‘भारतमाला परियोजना’ (NH-139W) के तहत बन रहे छह लेन पुल के निर्माण के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। गुरुवार की सुबह जब लॉन्चर शिफ्टिंग का बेहद संवेदनशील काम चल रहा था, तभी पूरा ढांचा भरभराकर गिर गया। इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा और कंपनियों के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।।
इस हादसे की चपेट में वहां काम कर रहे 6 मजदूर भी आ गए। स्थानीय लोगों और पुल बना रहे कर्मचारियों ने ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और घायल कर्मचारियों को फौरन वहां से निकाला गया। इसके बाद उन्हें तेजी से लालगंज रेफरल अस्पताल ले जाया गया। वहां कर्मचारियों का इलाज किया गया लेकिन 2 मजदूरों की हालत काफी गंभीर थी, इसलिए बेहतर इलाज के लिए उन्हें रेफर करना पड़ा।साथ ही, भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न हो, इसके लिए पूरे कार्यस्थल के सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) शुरू कर दिया गया है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पुल हादसे के फौरन बाद प्रतिक्रिया दी और कहा कि ‘बिहार में फिर एक पुल गिरा! वैशाली जिले में भ्रष्टाचार के बोझ से फिर एक ओर निर्माणाधीन पुल गिर जाने से करीब आधा दर्जन मजदूरों के दबने और घायल होने की खबर है। कई मजदूरों की हालत गंभीर है। घटिया निर्माण सामग्री, खराब गुणवत्ता, मानकों की अनदेखी जांच में अनियमितता और एनडीए नेताओं का भ्रष्टाचारी किरदार ही निरंतर गिरते पुलों का मुख्य कारण है। उम्मीद के मुताबिक भ्रष्ट एनडीए सरकार फिर अपने भ्रष्टाचार की लीपापोती करेगी।’
हालांकि, एनएचएआई (NHAI) ने बयान जारी कर इसे सिर्फ लॉन्चर शिफ्टिंग की तकनीकी खराबी बताया है और कहा है कि मुख्य पुल के स्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इतने बड़े प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी? अगर यह घटना दिन के किसी व्यस्त समय में होती, तो जान-माल का कितना बड़ा नुकसान हो सकता था?
लेकिन यह हादसा उन परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है जो इन मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं। विकास की इस बड़ी तस्वीर के पीछे इन मजदूरों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा, यह आज सबसे बड़ा सवाल है।