नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। प्रखंड के नागस्थान गांव में नागपंचमी के अवसर पर हर वर्ष नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। गांव के लोगों की नाग देवता में गहरी आस्था है। ग्रामीणों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद नाग देवता पूरी करते हैं और गांव की रक्षा भी करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, प्राचीन काल में नागस्थान गांव में बड़ी संख्या में सांपों का बसेरा हुआ करता था। खेतों में काम करने के दौरान ग्रामीणों को सैकड़ों की संख्या में नाग दिखाई देते थे। गांव के नाम को लेकर एक धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है। कहा जाता है कि जब गरुड़ सांपों का भक्षण करने लगे, तब अपनी जान बचाने के लिए बड़ी संख्या में नाग इस स्थान पर आकर एकत्रित हुए थे। इसी वजह से बाद में इस गांव का नाम नागस्थान पड़ गया।
ग्रामीण चुन्नू यादव बताते हैं कि आज तक गांव के किसी व्यक्ति को सांप के काटने की घटना नहीं हुई है। ग्रामीण इसे नाग देवता की कृपा मानते हैं और इसी विश्वास के कारण नाग देवता के प्रति उनकी श्रद्धा और मजबूत हुई है।
नागपंचमी के दिन गांव में सुबह से ही पूजा-अर्चना का माहौल रहता है। श्रद्धालु स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद नाग देवता की मूर्ति पर दूध, फूल, चंदन, अक्षत और मिठाई अर्पित करते हैं। महिलाएं कई स्थानों पर गोबर और कोयले से दीवारों पर सांप की आकृति बनाकर विधि-विधान से पूजा करती हैं। इस दौरान कई श्रद्धालु उपवास रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नाग देवता के प्रति उनकी आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। हर वर्ष नागपंचमी पर गांव में सामूहिक रूप से भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होते हैं और नाग देवता से गांव की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
पूजा-अर्चना में डॉ. चुन्नू कुमार, गुड्डू कुमार, हेमानती देवी, मिंता देवी, उपेंद्र बिंद, पारस सिंह, पिंटू, पंचायत समिति सदस्य उषा देवी, भगवनिया देवी, रमानती देवी, ओर्मिल सिंह, प्रमोद सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होते हैं। ग्रामीणों के लिए नागपंचमी का यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि गांव की वर्षों पुरानी परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतीक भी है।