किसान समृद्धि, महिला उद्यमिता, युवा रोजगार और श्रमिक उत्थान पर होगा फोकस : शिवराज सिंह चौहान
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। पटना के बामेती से गुरुवार को ‘कृषि जनकल्याण संवाद अभियान’ का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। अभियान के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने और श्रमिकों के उत्थान पर विशेष जोर दिया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान देश की समृद्धि की आधारशिला हैं और सरकार किसानों की सेवा एवं उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम करने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी किसानों को जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम जमीन में अधिक आमदनी सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से समेकित एवं एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके।
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह अभियान पाटलिपुत्र की धरती से शुरू होकर हर जिले तक पहुंचेगा। इसमें किसान, महिला, युवा और श्रमिक सभी की भागीदारी होगी। कृषि को जनकल्याण और प्रगति का आधार बनाकर बिहार के विकास को गति देने का प्रयास किया जाएगा।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में कृषि रोडमैप के माध्यम से कृषि क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण काम हुआ है। किसानों ने नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि भूमि सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य जारी है। किसानों को उनकी जमीन पर स्पष्ट और विवादमुक्त अधिकार दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए किसानों ने प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से कृषि लागत नियंत्रित करने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है। कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले किसानों को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया।
अभियान की अगली कड़ी में 22 अगस्त से गया से जिलास्तरीय कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इसके बाद राज्य के सभी जिलों में किसानों और पदाधिकारियों के साथ संवाद किया जाएगा। अभियान में आधुनिक कृषि, फसल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार से किसानों को जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।