नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। गंगा के उफान ने दानापुर और मनेर के दियारा अंचल में तबाही मचानी शुरू कर दी है। जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाने से निचले इलाकों के घरों, मंदिरों और स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे कुल 11 पंचायतें (दानापुर की 6 और मनेर की 5) गंभीर रूप से प्रभावित हैं। जिससे दर्जनों गांवों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों को सुरक्षित ठिकानों की तलाश है।
बिहार में उफनाई गंगा ने दानापुर और मनेर के दियारा इलाके की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। खेत-खलिहान ही नहीं, अब तो आस्था के केंद्र और सरकारी संस्थान भी जल समाधि लेते दिख रहे हैं। चारों तरफ पानी का पहरा है और बीच में फंसी है आम जनमानस की सांसें।स्थिति यह है कि दानापुर और मनेर की कुल 11 पंचायतें पानी के साए में जीने को मजबूर हैं। घरों के आंगन में मचलती लहरें और रास्तों पर पसर चुकी जलराशि ने ग्रामीणों को अपने ही घर में ‘प्रवासी’ जैसा अहसास करा दिया है।
छिहत्तर, महावीर टोला, इसलामगंज और हल्दी छपरा जैसे इलाकों में हालात बद से बदतर हैं। मंदिर परिसर और यज्ञशालाएं पानी में डूब चुकी हैं, जो यह चीख-चीख कर बताने के लिए काफी हैं कि प्रकृति का यह तांडव कितना विकराल है। हर रोज की जरूरत, एक प्याला पानी या दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी अब किसी परीक्षा से कम नहीं है। बच्चों की पढ़ाई थम चुकी है और स्कूल बंद हैं।
शहर तक पहुंचने के लिए लोगों को जोखिम भरे रास्तों और पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सबसे टीस देने वाली बात यह है कि अन्नदाता और ग्रामीण इस विपदा के बीच भी सरकारी महकमे की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। अब तक न तो पर्याप्त नावें मिल पाई हैं, न बच्चों के लिए राहत और न ही बेजुबान मवेशियों के लिए चारे का कोई मुमुक्षु प्रबंध। हर कोई बस एक ही सवाल पूछ रहा है। क्या हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है?
गंगा के उफान से खेतों में पानी भरने के कारण मवेशियों के लिए हरा चारा पूरी तरह डूब चुका है। पशुपालक अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते पानी के बीच से चारा लाने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि इंसानों के साथ-साथ उनके बेजुबान मवेशी भी भूखे मरने की कगार पर हैं।
बाढ़ के घिर जाने से यदि कोई ग्रामीण बीमार पड़ जाए, तो अस्पताल पहुंचना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। समय पर नाव और चिकित्सा सुविधा न मिलने से लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत राहत सामग्री, नाव और पशु आहार उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। स्थिति का जायजा लेने पहुंचे मंत्री व विधायक रामकृपाल यादव ने हालात की गंभीरता को स्वीकार किया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव मदद देने का भरोसा दिलाया गया है, लेकिन धरातल पर राहत अब भी दूर है।