सीडीपीओ कार्यालय पर नारेबाजी, जल्द मांगें पूरी नहीं होने पर राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। छह महीने से बकाया मानदेय समेत छह सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को मसौढ़ी की आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का गुस्सा फूट पड़ा। बिहार आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका संघ के बैनर तले सैकड़ों सेविका-सहायिकाओं ने सीडीपीओ कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान सेविका-सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर छह सूत्री मांग-पत्र संबंधित कार्यालय को सौंपा। धरना का नेतृत्व प्रमुख रूप से आशा कुमारी, सुजाता कुमारी, इसमत प्रवीण, सोनी कुमारी, निम्की कुमारी, अर्चना कुमारी, प्रेमलता कुमारी और सुनीता कुमारी ने किया।
प्रदर्शनकारी सेविका-सहायिकाओं ने आरोप लगाया कि उनका मानदेय पिछले कई महीनों से बकाया है और भुगतान भी नियमित रूप से नहीं किया जा रहा है। सुजाता कुमारी और आशा कुमारी ने कहा कि महीनों से मानदेय लंबित है और खंड-खंड में भुगतान कर केवल खानापूर्ति की जा रही है। इससे सेविका-सहायिकाओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं इसमत प्रवीण और सोनी कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यों के लिए उनसे 5जी मोबाइल के माध्यम से लगातार ऑनलाइन काम कराया जा रहा है, लेकिन मोबाइल रिचार्ज के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल कार्यों का बोझ बढ़ने के बावजूद आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
मांग-पत्र में सेविका से महिला पर्यवेक्षिका तथा सहायिका से सेविका के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की गई है। इसके अलावा पोशाक, अन्नप्राशन, गोदभराई, प्रोत्साहन राशि, मकान किराया और मोबाइल रिचार्ज से संबंधित बकाया राशि का अविलंब भुगतान करने की मांग रखी गई।
प्रदर्शनकारियों ने महंगाई को देखते हुए मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की भी मांग की। साथ ही न्यायालय के आदेश के अनुसार ग्रेच्युटी और सेवान्त लाभ लागू करने की मांग उठाई गई।
धरना को संबोधित करते हुए निम्की कुमारी, अर्चना कुमारी और प्रेमलता कुमारी ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी हड़ताल का भी निर्णय लिया जा सकता है।
सेविका-सहायिकाओं ने स्पष्ट कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। ऐसे में सरकार और विभाग को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।