वर्ष 2024 व 2025 से अधिक हो रहा सोन का प्रवाह
डॉ. उपेंद्र कश्यप
दाउदनगर (औरंगाबाद)। सोन नदी उफान पर है। इंद्रपुरी से लेकर पटना की ओर गंगा में मिलने से पहले तक कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने सोन किनारे बसे गांवों के लिए अलर्ट जारी किया है। इसके बावजूद कई जगह लोग बाढ़ देखने के लिए नदी के नजदीक पहुंच रहे हैं।
इंद्रपुरी बराज वाटर मैनेजमेंट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सोन नदी में 5.60 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। बराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। हालांकि, यह प्रवाह इंद्रपुरी बराज से छोड़े गए अब तक के सर्वाधिक जलप्रवाह से काफी कम है।
इंद्रपुरी बराज से छोड़े गए जलप्रवाह के इतिहास के अनुसार, 23 अगस्त 1975 को 14.48 लाख क्यूसेक का सर्वाधिक प्रमाणित डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। 25 सितंबर 2011 को 9.58 लाख क्यूसेक तथा वर्ष 2016 में लगभग 11.67 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
हाल के वर्षों में वर्ष 2024 में 5.22 लाख और 2025 में 5.39 लाख क्यूसेक का अधिकतम डिस्चार्ज दर्ज हुआ। वहीं, 2 सितंबर 2026 को 5.60 लाख क्यूसेक के साथ सोन का प्रवाह इन दोनों वर्षों के अधिकतम स्तर से ऊपर पहुंच गया। हालांकि, यह 1975 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से अभी काफी नीचे है।
सोन की बाढ़ को स्थानीय बोली में ‘हुल्लड़’ कहा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सोन में उफान आने पर पानी तेज शोर, गड़गड़ाहट और तीव्र बहाव के साथ आगे बढ़ता है। इसी कारण पुराने समय से इसकी भयानक बाढ़ के लिए ‘हुल्लड़’ शब्द का इस्तेमाल होता रहा है। सामान्य बोलचाल में हुल्लड़ का अर्थ शोर-शराबा, उपद्रव या अफरा-तफरी होता है।