कराय पंचायत में किसानों ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन, कहा- कर्ज लेकर और बटाई पर की थी खेती, अब घर में खाने तक का संकट
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। अनुमंडल क्षेत्र में आई बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से सैकड़ों बीघा में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई है। पानी उतरने के बाद खेतों में तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। धान की फसल पीली पड़ने के साथ ही सड़ने लगी है। फसल बर्बाद होने से आहत किसान अब मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं।
मसौढ़ी प्रखंड की कराय पंचायत में मंगलवार को सैकड़ों किसानों ने सड़क जाम कर विरोध-प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार और प्रशासन से बाढ़ से हुई फसल क्षति का तत्काल आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा।
किसानों का कहना है कि कराय पंचायत में करीब 500 बीघा में लगी धान की फसल पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गई। अब पानी धीरे-धीरे खेतों से निकल रहा है, लेकिन तब तक फसल पूरी तरह गलकर नष्ट हो चुकी है। किसानों के अनुसार धान की फसल तैयार होने की ओर थी और इसी के भरोसे परिवार के सालभर के खर्च और भोजन की उम्मीद थी। बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि अधिकांश किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया था। कई किसानों ने बटाई पर तो कई ने पट्टा लेकर जमीन पर धान की खेती की थी। खेती में बीज, खाद, जुताई और मजदूरी समेत काफी खर्च हुआ था। फसल बर्बाद होने के बाद अब कर्ज चुकाने की चिंता के साथ परिवार के भरण-पोषण का संकट भी खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन में शंभू यादव, विद्यानंद यादव, हरिचरण रविदास, रामजन्म यादव, विजेंद्र यादव, सोमारी यादव, संजय यादव, राम इकबाल रविदास, जोगेंद्र पासवान, जीतन पासवान समेत सैकड़ों किसान शामिल थे। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित गांवों और खेतों का जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए और बिना किसी भेदभाव के वास्तविक पीड़ित किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
मामले में प्रखंड कृषि पदाधिकारी हर्ष पटेल ने कहा कि सभी किसान सलाहकारों को अपने-अपने पंचायतों में जाकर फसल क्षति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। फसल क्षति के आकलन के बाद चिन्हित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
वहीं, खेत मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष नागेश्वर पासवान ने बाढ़ से प्रभावित बटाईदार और पट्टेदार किसानों के मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में किसान दूसरे की जमीन पर बटाई या पट्टे पर खेती करते हैं। अक्सर मुआवजे की प्रक्रिया में खेत मालिक तक सहायता पहुंच जाती है, जबकि वास्तविक रूप से खेती करने वाला बटाईदार किसान वंचित रह जाता है।
उन्होंने मांग की कि सरकार और प्रशासन ऐसे किसानों की अलग से पहचान कर उन्हें भी फसल क्षति का उचित मुआवजा उपलब्ध कराए। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पासवान ने भी बाढ़ प्रभावित किसानों के साथ-साथ बटाईदार और पट्टेदार किसानों को मुआवजा देने की मांग का समर्थन किया है।