प्रेस’ के मुखौटे में घूम रही थी दिल्ली से चोरी हुई कार, शिवसागर पुलिस की पैनी नजर ने उतारा ‘फर्जीवाड़ा’ का शीशा
बेताब अहमद
सासाराम। बिहार के शिवसागर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस और परिवहन विभाग के भी होश उड़ा दिए हैं। दिल्ली की सड़कों से गायब हुई एक कार, जिस पर ‘प्रेस’ (PRESS) का स्टीकर चिपकाकर कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही थी, आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ ही गई।
अमूमन लोग प्रेस लिखे वाहनों को बिना जांचे छोड़ देते हैं, लेकिन जांच टीम ने बिना किसी दबाव के कार के विवरण की गहनता से जांच की। शिवसागर में रूटीन वाहन चेकिंग के दौरान जब मोटर वाहन निरीक्षक की नजर शीशे पर लिखे ‘प्रेस’ शब्द पर पड़ी, तो उन्हें कुछ अजीब लगा। यह संदेह एक बड़े राज से पर्दा उठाने की वजह बन गया। जब कार (नंबर: DL 1ZC 0575) के कागजातों की डिजिटल कुंडली खंगाली गई, तो सच सामने आ गया। यह कार दिल्ली के गोविंदपुरी साउथ ईस्ट थाने में साल 2019 से दर्ज एक चोरी के मामले (कांड संख्या 045536) में वांटेड थी। दिल्ली की टैक्सी यूनिट ने इसे ‘ब्लैकलिस्ट’ कर रखा था।
मोटर वाहन निरीक्षक की इस त्वरित कार्रवाई के बाद कार को तुरंत शिवसागर थाना परिसर में जब्त कर लिया गया है।रिकॉर्ड के मुताबिक, गाड़ी का फिटनेस पिछले 6 साल से (2020 तक) और परमिट 3 साल से (2023 तक) फेल था। पुलिस फिलहाल दो मुख्य बिंदुओं पर तफ्तीश कर रही है: पहला, दिल्ली की चोरी की कार शिवसागर कैसे पहुंची और दूसरा, ‘प्रेस’ के नाम का दुरुपयोग कर इसे कौन चला रहा था।
पुलिस प्रशासन इस कामयाबी के बाद अब उस गिरोह तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है जो अंतरराज्यीय स्तर पर चोरी की गाड़ियों को ठिकाने लगाता है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा रहस्य यह है कि दिल्ली से चोरी हुई यह कार शिवसागर तक कैसे पहुंची और ‘प्रेस’ का टैग लगाकर इसका इस्तेमाल कौन से बड़े खेल के लिए किया जा रहा था?
गाड़ियों पर ‘प्रेस’, ‘पुलिस’ या ‘अध्यक्ष’ लिखकर खुद को कानून से ऊपर समझने वालों के लिए शिवसागर की यह खबर एक बड़ा सबक है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गाड़ियों पर इस तरह के रसूखदार शब्द लिखकर कौन-कौन से अवैध काम किए जा रहे हैं? फिलहाल गाड़ी तो जब्त हो चुकी है, लेकिन पुलिस अब इस फर्जीवाड़े की पूरी कड़ियाँ जोड़ने में लगी है कि इस वीआईपी मुखौटे के पीछे असली चेहरा किसका है।