नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
बेगूसराय। बिहार राज्य के बेगूसराय की 16 साल की एक किशोरी को पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में जटिल सर्जरी के बाद नई जिंदगी मिली है। डॉक्टरों ने उसके जकड़े हुए जबड़े का 3- डी इम्प्लांट की मदद से पुनर्निर्माण किया। संस्थान का दावा है कि बिहार में इस तरह की यह पहली सर्जरी है।
जानकारी के अनुसार, किशोरी के जबड़े में गंभीर समस्या थी, जिसके कारण उसका मुंह ठीक से नहीं खुल पा रहा था। इस स्थिति की वजह से उसे रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। समस्या बढ़ने के बाद परिजन उसे इलाज के लिए आई जी आई एम एस लेकर पहुंचे।
अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों की टीम ने किशोरी की स्थिति का आकलन किया और सर्जरी की योजना तैयार की। जटिलता को देखते हुए 3- डी तकनीक से तैयार इम्प्लांट की मदद से जबड़े का पुनर्निर्माण किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रक्रिया में मरीज की जरूरत के अनुसार इम्प्लांट तैयार करना महत्वपूर्ण था। सर्जरी के बाद किशोरी की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है। उसके जबड़े की गतिविधि में भी सुधार हुआ है। डॉक्टरों की टीम फिलहाल उसकी रिकवरी पर नजर रख रही है।
आई जी आई एम एस के डॉक्टरों ने इसे बिहार में अपनी तरह का पहला मामला बताया है। इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल से जटिल जबड़े संबंधी समस्याओं के इलाज में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है। 3- डी इम्प्लांट तकनीक के जरिए मरीज की शारीरिक संरचना के अनुरूप इम्प्लांट तैयार किया जा सकता है, जिससे सर्जरी को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलती है। किशोरी के सफल उपचार के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल की टीम का आभार जताया। वहीं,आई जी आई एम एस के लिए भी यह चिकित्सा उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी को सफल बनाने में शामिल सभी विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना की है।