पटना की सड़कों पर गूंजी उपेक्षितों की पुकार: बाढ़, बदहाली और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे अन्नदाता और छात्र
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। राजधानी पटना की सड़कें आज एक बार फिर आम जन की पीड़ा की गवाह बनीं। गांधी मैदान से लेकर जेपी गोलंबर तक जिधर नजर गई, उधर हाथों में तख्तियां लिए छात्र, किसान और मजदूर व्यवस्था के खिलाफ अपनी अनदेखी का हिसाब मांगते दिखे। पटना की सड़कों पर किसानों, मजदूरों, छात्रों और वाम दलों का भारी जुटान हुआ।प्रदर्शनकारियों का यह सैलाब सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उन आंसुओं और संघर्षों का परिणाम था जो बाढ़ और सूखे की मार झेल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बाढ़-सूखा, वित्त रहित शिक्षा नीति, बेरोजगारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई।
पोस्टर पर लिखे नारे “वित्त रहित शिक्षा का कलंक मिटाओ” और “बाढ़-सूखे का स्थायी निदान करो” सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी पर एक गंभीर सवाल थे। परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर छात्रों के फेल होने से खफा युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई। उनका सवाल सीधा था अगर युवाओं का भविष्य यूं ही अंधेरे में रहेगा, तो देश का विकास कैसे होगा? जब इन दबे-कुचले लोगों की आवाज बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने लगी, तो प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। डाकबंगला चौराहे पर पुलिस की सख्ती और महिला प्रदर्शनकारी की डिटेंशन ने यह दिखा दिया कि अधिकार मांगने वालों और सत्ता के पहरेदारों के बीच की दूरी कितनी गहरी हो गई है।
जेपी गोलंबर के पास प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बन गयी। SDPO कामख्या नारायण सिंह के साथ प्रदर्शनकारियों की तीखी बहस भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मौके पर सुरक्षा बढ़ा दी। जेपी गोलंबर के बाद प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़े। यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया। कई महिला और पुरुष प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मी पकड़कर मौके से ले जाते दिखे। कुछ प्रदर्शनकारियों को टांग-टांगकर ले जाने का वीडियो भी सामने आया है।
डाकबंगला पर पुलिस कार्रवाई के दौरान कई महिला और पुरुष प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मौके पर पटना SSP कार्तिकेय शर्मा, सिटी एसपी वेस्ट संकेत कुमार, सिटी एसपी ईस्ट शैलजा समेत कई वरीय पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल की तैनाती की। यह आंदोलन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आम जनता और युवाओं के भीतर सुलगते असंतोष का परिणाम है, जहां लोग अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए शासन-प्रशासन के सामने सीधे खड़े हैं।