बेताब अहमद
औरंगाबाद। जिसने संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत (जितिया) रखा था, लेकिन अगले ही दिन उसकी गोद सूनी हो गई। त्योहार की खुशियां उस समय चीख-पुकार में बदल गईं, जब जितिया विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। मामला माली थाना क्षेत्र के बैरिया पंचायत के कुलहड़िया गांव का है, जहां रविवार की सुबह रामरेखा-पुनपुन संगम तट पर जितिया डूबाने गई 13 वर्षीय किशोरी हर्षिका कुमारी की नदी में डूबने से मौत हो गई। हालांकि, ग्रामीणों की तत्परता से दो अन्य बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया।
कैसे हुआ हादसा ?
परिजनों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात गांव में पारंपरिक रूप से जितिया पर्व मनाया गया था। रविवार की सुबह कुलहड़िया गांव निवासी प्रमोद नोनिया की पुत्री हर्षिका कुमारी 13 वर्ष अपने साथियों के साथ रामरेखा-पुनपुन संगम तट पर जितिया विसर्जन के लिए गई थी। विसर्जन की रस्म पूरी करने के बाद तीनों बच्चे नदी में स्नान करने लगे। इसी दौरान पैर फिसलने या गहराई का अंदाजा न होने के कारण तीनों गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
देवदूत बने ग्रामीण, पर हर्षिका को नहीं बचा सके
गनीमत रही कि उस समय नदी किनारे कुछ ग्रामीण टहल रहे थे। बच्चों को डूबता देख उन्होंने तुरंत शोर मचाया और बिना वक्त गंवाए नदी में कूद गए। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद एक किशोर और एक किशोरी को तो पानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन हर्षिका का कोई सुराग नहीं मिला। काफी देर तक खोजबीन करने के बाद ग्रामीणों ने हर्षिका के शव को गहरे पानी से बाहर निकाला। शव देखते ही घाट पर मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की सूचना मिलते ही माली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। माली थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि “नदी में डूबने से किशोरी की असमय मौत हुई है। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।”
इतने बड़े त्योहार के मौके पर नदी घाटों पर गोताखोरों, बैरिकेडिंग या पुलिस बल की तैनाती क्यों नहीं थी? धार्मिक आस्था और त्योहारों के दौरान नदियों या तालाबों के घाटों पर अक्सर ऐसे हादसे सामने आते हैं। हमारा आप सभी से अनुरोध है कि जब भी बच्चे जलस्रोतों के पास जाएं, तो बड़े-बुजुर्ग उनके साथ जरूर रहें और उन्हें गहरे पानी में जाने से रोकें। एक छोटी सी सावधानी किसी का घर उजड़ने से बचा सकती है।