नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर में फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऐसे नेटवर्क के मास्टरमाइंड एजाज कमर को गिरफ्तार किया है, जो थाने से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का काम चला रहा था। पुलिस की जांच में बांग्लादेशी नागरिक के नाम पर बने पासपोर्ट का रिकॉर्ड मिला है, जबकि एजाज कमर की ट्रैवल हिस्ट्री में लंदन कनेक्शन सामने आने के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। ऐसे में बिहार में विदेशी नागरिकों के भारतीय दस्तावेज हासिल करने के मामले को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है
पुलिस के मुताबिक कन्हाई कम्युनिकेशन पर छापेमारी के दौरान लैपटॉप, आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर, यूआईडीएआई मशीन, फिंगरप्रिंट और आई स्कैनर समेत कई सामान बरामद किए गए। आठ मूल आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी आधार तैयार करने के बाद उनका इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने के लिए किया जाता था। बता दें कि इससे पहले इसी मामले की जांच में बांग्लादेशी नागरिक बेलाल होसेन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मो. आफताब के नाम से पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आ चुका है।
मुजफ्फरपुर का यह मामला इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि कुछ दिन पहले बिहार में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बन जाने का मामला सामने आया था। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की ओर से भेजी गई जानकारी के मुताबिक बिहार के पते पर 31 संदिग्ध अफगानी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट जारी होने की बात सामने आई थी। इनमें 30 लोगों के पास अफगानिस्तान का पासपोर्ट भी होने की जानकारी दी गई थी। जांच में यह भी सवाल उठा था कि इन लोगों ने भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए फर्जी आधार या दूसरे पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे किया और पुलिस सत्यापन के बाद भी पासपोर्ट कैसे जारी हो गए।
जांच में बिहार के पते पर दो बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इनमें एक मामला सीधे मुजफ्फरपुर से जुड़ा है। बांग्लादेशी नागरिक बेलाल होसेन के लिए मुजफ्फरपुर के दीवान रोड का पता इस्तेमाल कर मो. आफताब के नाम से पासपोर्ट जारी कराया गया था। पुलिस के मुताबिक इस पासपोर्ट में इस्तेमाल दस्तावेज फर्जी थे। जांच में सिर्फ मुजफ्फरपुर तक सीमित नेटवर्क की तस्वीर नहीं दिख रही है। पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि फर्जी आधार बनाने का नेटवर्क पटना समेत उत्तर बिहार के दूसरे इलाकों तक फैला हो सकता है। सूत्रों की जानकारी के मुताबिक पटना के एक अधिकृत आधार सेंटर के कर्मी के लॉगिन और पासवर्ड का इस्तेमाल मुजफ्फरपुर में फर्जी आधार बनाने के लिए किए जाने की बात भी सामने आई है।
इन फर्जी आधार के जरिए बांग्लादेशी और अफगानी नागरिकों के पासपोर्ट तक बनवाए जाने की जांच की जा रही है। मास्टरमाइंड एजाज कमर की ट्रैवल हिस्ट्री में लंदन कनेक्शन मिलने के बाद पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी आधार और पासपोर्ट का यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित था या इसके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि अब तक कितने फर्जी आधार और पासपोर्ट तैयार किए गए और इनके जरिए किन-किन लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
बहरहाल, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर फर्जी आधार के जरिए विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय पासपोर्ट तैयार कराए जा रहे थे, तो दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया में यह फर्जीवाड़ा पकड़ में क्यों नहीं आया। 31 अफगानी नागरिकों के पासपोर्ट और अब मुजफ्फरपुर के फर्जी आधार-पासपोर्ट नेटवर्क के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने इसी कड़ी को जोड़ना सबसे अहम चुनौती है।