1,731 केंद्रों पर पुरानी प्रशिक्षण व्यवस्था बहाल करने की मांग, आंदोलनकारियों ने सरकार से शीघ्र वार्ता की अपील की
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। बिहार के 1,731 कुशल युवा कार्यक्रम (केवाईपी) केंद्रों पर पूर्ववर्ती प्रशिक्षण व्यवस्था दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर गर्दनीबाग में जारी ‘केवाईपी बचाओ महाआंदोलन 2.0’ के 14 दिन पूरे हो गए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि इतने दिनों बाद भी संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ऐसे में आंदोलन को तेज करने की तैयारी की जा रही है। आंदोलन के संचालक डॉ. आनंद रंजन झा के अनुसार, 23 अक्टूबर से भूख हड़ताल शुरू करने के लिए प्रशासनिक अनुमति मिल गई है।
डॉ. झा ने बताया कि यह आंदोलन 9 अक्टूबर 2026 से जारी है। केंद्र संचालक सभी 1,731 पूर्ववर्ती केवाईपी केंद्रों पर पहले की तरह प्रशिक्षण व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में ‘डिजिटल मित्रा’ कोर्स को लेकर हो रही चर्चा से भी केंद्र संचालकों की चिंता बढ़ी है।
डॉ. आनंद रंजन झा ने कहा कि आंदोलन केवल केंद्र संचालकों के हितों तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े लर्निंग फैसिलिटेटर (एलएफ), कोऑर्डिनेटर और अन्य कर्मचारियों की आजीविका के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र संचालक अपने रोजगार, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा, “यह लड़ाई सभी केवाईपी केंद्र संचालकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए है। अब यह आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन चुकी है। हम लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में संघर्ष जारी रखेंगे और सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा करते हैं।”
आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग से मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द वार्ता शुरू करने की अपील की है। उनकी मांग है कि सभी 1,731 केवाईपी केंद्रों पर पूर्ववर्ती प्रशिक्षण व्यवस्था बहाल करने के संबंध में स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि केंद्र संचालकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के बीच बनी अनिश्चितता दूर हो सके।
आंदोलन के संचालक डॉ. आनंद रंजन झा ने स्पष्ट किया कि मांगों के समाधान तक आंदोलन संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। अब सबकी निगाहें सरकार और संबंधित विभाग की अगली पहल पर टिकी हैं।