बहुमंजिली इमारतों से लेकर सरकारी जमीन तक: बिहार के 6 नगर निकायों में विशेष सर्वे की अधिसूचना जारी
बेताब अहमद
पटना। गांवों के बाद अब शहरों की बारी आ गई है! अब नगर निकायों के चक्कर काट-काटकर आधार, मोबाइल नंबर और खानदानी कागजों का मिलान कराने का वक्त आ गया है। देखना यह है कि दशकों पुराने शहरी मकानों और फ्लैटों के कागजात जुटाने में लोगों को कितनी मशक्कत करनी पड़ती है। बिहार सरकार ने शहरी इलाकों में संपत्ति विवाद खत्म करने के लिए सारण, बक्सर, नालंदा, मुंगेर, बांका और रोहतास के 6 निकायों में विशेष भूमि सर्वेक्षण की शुरुआत की है। अब सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपके फ्लैट, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, पानी के अधिकार और रास्ते का पूरा ब्योरा आधार और मोबाइल नंबर के साथ ऑनलाइन दर्ज होगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों के बाद शहरों सोनपुर से डेहरी डालमियानगर तक के नागरिकों को भी अपने मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज दिखाने होंगे। बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट मालिकों के समानुपातिक हक और लगान का निर्धारण कानूनी आधार पर होगा। ऐसे में संपत्ति मालिकों को शिविरों में समय रहते सही घोषणा-पत्र देना अनिवार्य होगा।
इसमें निजी जमीन के साथ केंद्र और राज्य सरकार की भूमि भी शामिल होगी। सर्वेक्षण के बाद जमीन के स्वामित्व, क्षेत्रफल, दखल और उससे जुड़े अधिकारों का विस्तृत अभिलेख तैयार किया जायेगा। विभाग की 14 अक्तूबर, 2026 की अधिसूचना के अनुसार, यह व्यवस्था राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी। इसके दायरे में सारण जिले का सोनपुर नगर परिषद, बक्सर जिले का बक्सर नगर परिषद, नालंदा जिले का राजगीर नगर परिषद, मुंगेर जिले का तारापुर नगर पंचायत, बांका जिले का बांका नगर परिषद और रोहतास जिले का डेहरी डालमियानगर नगर परिषद शामिल हैं।
अधिकार अभिलेख में प्रत्येक रैयत अथवा अभिधारी का नाम, पिता या पति का नाम, पत्राचार का पता, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज किया जायेगा। जमीन का क्षेत्रफल, धारित हिस्सा और उस पर बने भवनों का विवरण भी शामिल होगा। एकल स्वामित्व वाले भवनों के साथ बहुमंजिला भवनों में एक से अधिक मालिक होने की स्थिति में बहुस्वामित्व का ब्योरा भी दर्ज किया जायेगा। इसके अलावा, जमीन रखने वाले व्यक्ति की श्रेणी, भूधृति की प्रकृति, स्थायी भूधृति होने या नहीं होने सहित लगान बढ़ने की पात्रता से संबंधित जानकारी भी अभिलेख में शामिल होगी। सर्वेक्षण में देय लगान, उसके निर्धारण का आधार और समय-समय पर हुई बढ़ोतरी का विवरण दर्ज किया जायेगा। लगान संविदा, न्यायिक आदेश अथवा किसी अन्य आधार पर तय हुआ है, इसकी जानकारी भी अभिलेख में रहेगी।
जमीन तक पहुंचने के रास्ते और अन्य सुविधाओं से जुड़े अधिकार, कृषि के लिए नदी, झील, तालाब, कुएं या दूसरे स्रोतों से पानी के उपयोग और जलापूर्ति के साधनों की मरम्मत और रखरखाव से संबंधित अधिकार एवं दायित्व भी दर्ज होंगे। लगानमुक्त जमीन के दावों और बिना लगान भुगतान के भूमि धारण करने के कानूनी आधार का भी उल्लेख किया जायेगा। घोषित प्रोपराइटर की निजी भूमि की स्थिति, क्षेत्रफल और चौहद्दी का विवरण भी तैयार होगा। शहरी क्षेत्रों में जमीन के सर्वेक्षण को सुचारु बनाने के लिए बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली में 2026 में संशोधन किया गया था। इससे पहले डेहरी-डालमियानगर में शहरी भूमि सर्वेक्षण का पायलट प्रयोग किया गया था। अब छह शहरी निकायों के लिए जारी अधिसूचना के माध्यम से इस दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
बिहार के शहरों में लंबे समय से चले आ रहे पुराने और जटिल रिकॉर्ड्स को दुरुस्त करने के लिए यह पहल एक ऐतिहासिक कदम है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, उत्तराधिकार के मामलों में स्पष्टता आएगी और भविष्य में प्रॉपर्टी खरीदना-बेचना बेहद आसान व सुरक्षित हो जाएगा।