कलयुग का श्रवण कुमार: मां की जिंदगी के लिए मन्नत मांग, दौड़कर शिव धाम पहुंच रहा बिहार का मोनू
बेताब अहमद
पटना। जब दुनिया में अपनी मां की सांसे थमने जैसी स्थिति हो, तो एक बेटे का दिल किस दौर से गुजरता है, यह मोनू की मन्नत से समझा जा सकता है। जब उनकी मां लालती देवी गंभीर बीमारी से उबरीं, तो बेटे का दिल कृतज्ञता से भर गया। मां की जिंदगी के बदले भगवान शिव को दिया गया अपना वचन निभाने के लिए यह किशोर धूप, थकान और अनिश्चित रास्तों की परवाह किए बिना दौड़ रहा है। यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मां के आंचल की छांव को सलाम करती एक बेटे की तपस्या है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां रिश्तों की परिभाषाएं बदल रही हैं, वहीं बिहार के अररिया के मोनू मेटुरबाला ने अपनी निष्ठा से समाज को झकझोर दिया है। रास्ते में मिलने वाले आम लोग, दुकानदार और युवा जब उनका हौसला बढ़ाते हैं, तो यह इस बात का प्रमाण बनता है कि नेकी और सच्ची भावना आज भी लोगों को जोड़ती है। उनकी यह यात्रा युवाओं को शॉर्टकट छोड़कर अपने माता-पिता के प्रति समर्पण और वादों पर अडिग रहने का संदेश देती है।
बिहार के अररिया जिले के रहने वाले 19 वर्षीय एथलीट/युवक मोनू मेटुरबाला ने जो कर दिखाया है, वह किसी अल्ट्रा-मैराथन से कम नहीं है। 15 मार्च 2026 से अपनी यात्रा शुरू करने वाले मोनू हर रोज औसतन 50 किलोमीटर की दौड़ लगा रहे हैं। बिना किसी प्रोफेशनल कोचिंग के, सिर्फ जज्बे और संकल्प के दम पर 8,000 किलोमीटर का सफर तय करना इंसानी स्टेमिना (सहनशक्ति) और मानसिक मजबूती की मिसाल है। खेल प्रेमियों के लिए यह कहानी दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो शरीर की सीमाएं भी पीछे छूट जाती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोनू अब तक करीब 8 हजार किलोमीटर दौड़ चुके हैं और 12 में से 5 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के मुताबिक, वह हर रोज लगभग 50 किलोमीटर तक दौड़ लगाते हैं। उनकी यात्रा की शुरुआत झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम से हुई थी। मां की सेहत में सुधार हुआ, तो मोनू ने भी अपना वादा निभाने की ठान ली। बताया जाता है कि 15 मार्च 2026 को वह अपने घर से इस अनोखी आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़े। उनकी मंजिल थी देश के 12 ज्योतिर्लिंग और उनका सहारा था उनका हौसला। मोनू की मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। परिवार के लिए वह समय बेहद मुश्किल था। मां की हालत देखकर मोनू ने भगवान शिव से प्रार्थना की और मन ही मन एक वादा कर लिया। उन्होंने मन्नत मांगी कि अगर उनकी मां स्वस्थ हो जाती हैं, तो वह दौड़कर भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करेंगे।
मोनू जहां-जहां पहुंच रहे हैं, वहां लोग उनसे मिलने, तस्वीरें खिंचवाने रहें हैं। उनका हौसला बढ़ाने के लिए जुट रहे हैं। कई लोग उनके साथ दौड़ते हुए भी नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘कलयुग का श्रवण कुमार’ कहकर बुला रहे हैं। लेकिन मोनू की कहानी सिर्फ दौड़ने या धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है। यह उस रिश्ते की कहानी है, जिसमें एक बेटे की दुआ, मां के प्रति समर्पण और अपने वचन को निभाने का जज्बा दिखाई देता है।
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग इन जगहों पर है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग- सौराष्ट्र गुजरात, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग- कुर्नूल आंध्र प्रदेश, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग- उज्जैन मध्य प्रदेश, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग- खंडवा मध्य प्रदेश, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग- हिमालय उत्तराखंड, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग- पुणे महाराष्ट्र, काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग- वाराणसी उत्तर प्रदेश, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग- नासिक महाराष्ट्र, बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग- देवघर झारखंड, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग- द्वारका गुजरात, रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग- रामेश्वरम द्वीप तमिलनाडु एवं घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग- औरंगाबाद महाराष्ट्र।