बिहार का गौरव: खगड़िया के छात्र अमन की कविता NCERT पाठ्यक्रम में शामिल, वीसी ने की सराहना।
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
खगड़िया। हर साल कोसी की विनाशकारी बाढ़ और उससे उपजे विस्थापन का दर्द झेलने वाले अंचल से अब एक उम्मीद भरी आवाज उठी है. अमन कुमार की पंक्तियां “कोसी के किनारे खड़ा हूं, पानी से नहीं, समय से लड़ता हूं” सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की जीवटता की कहानी है जो हर साल उजड़ कर फिर से जिंदगी बसाते हैं। जब कोई रचना किताबी दुनिया से निकलकर सीधे समाज के संघर्ष को आवाज़ देती है, तो वह कालजयी बन जाती है।
खगड़िया के कोसी कॉलेज के छात्र और एनसीसी कैडेट अमन कुमार ने यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे जितनी भी कठिन हों, सच्ची लगन और प्रतिभा एक दिन नया रास्ता बना ही लेती है। उनकी कविता ‘नदी के उस पार भी घर है’ का एनसीईआरटी की समीक्षा के लिए चुना जाना बिहार के हज़ारों युवा रचनाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह इस बात का प्रमाण है कि छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों की पीड़ा भी अब राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और मुख्यधारा की चर्चा का हिस्सा बन सकती है।
शिक्षा मंत्रालय के अधीन एनसीईआरटी की समीक्षा प्रक्रिया के लिए कोसी कॉलेज इतिहास प्रतिष्ठा, प्रथम सेमेस्टर के छात्र एवं 09 बिहार बटालियन बरौनी के एनसीसी कैडेट अमन कुमार की मौलिक रचना को विचारार्थ स्वीकार किया गया है। मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय द्वारा इस उपलब्धि पर जताई गई खुशी और प्रोत्साहन ने अकादमिक और साहित्यिक जुड़ाव को एक नया आयाम दिया है।
पत्र के अनुसार, इस रचना को शैक्षणिक समीक्षा तथा भविष्य में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल करने की संभावनाओं के संदर्भ में विचारार्थ स्वीकार किया गया है। मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी छात्र अमन की इस साहित्यिक उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। स्थानीय लोगों और शिक्षकों का कहना है कि अमन की रचनाओं में कोसी क्षेत्र की त्रासदी, विनाशकारी बाढ़, विस्थापन और आम जनजीवन के संघर्ष की गहरी झलक दिखाई देती है। उन्होंने अपनी एक अन्य चर्चित कविता ‘कोसी के किनारे’ में नदी के साथ जुड़े जीवन की अनिश्चितताओं और चुनौतियों को बेहद संजीदगी से उकेरा है: “कोसी के किनारे खड़ा हूं, पानी से नहीं, समय से लड़ता हूं। हर बरस नदी कुछ ले जाती है, फिर भी मिट्टी उम्मीद उगाती है।” इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने कोसी की बाढ़ से प्रभावित अनगिनत परिवारों के दर्द को व्यक्त करने के साथ-साथ उनकी अटूट जीवटता और शून्य से दोबारा जीवन संवारने की अदम्य उम्मीद को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा है।