शिक्षा विभाग में हड़कंप: अफसरों की लापरवाही की सजा भुगत रहे छोटे कर्मचारी
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
भागलपुर। शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे हुए इस फर्जीवाड़े में अब स्थापना शाखा के निम्न वर्गीय लिपिक जफर अली को सस्पेंड कर दिया गया है। विभागीय गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि आखिर डिजिटल सिस्टम की इस चूक के लिए एक छोटे क्लर्क को क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि सूत्रों का दावा है कि जफर को अपनी मेकर आईडी होने की जानकारी तक नहीं थी। ऑपरेटर अविनाश राज ने बैक डेट में फर्जी शिक्षिका तनुश्री का प्रोफाइल तैयार किया, लेकिन गाज जफर अली पर गिरी। कर्मचारी संगठनों में इस बात को लेकर सुगबुगाहट है कि क्या सिस्टम की कमियों और बड़े अफसरों की निगरानी में हुई चूक का ठीकरा छोटे कर्मचारियों पर फोड़ा जा रहा है? जांच के बाद ही साफ होगा कि जफर अली गुनहगार हैं या व्यवस्था के शिकार।
आरोप है कि आपरेटर अविनाश राज ने 29 मार्च 2026 को बैक डेट में वर्ष 2025 की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर तनुश्री नाम की फर्जी शिक्षिका की आईडी तैयार की थी। इसके बाद इसी फर्जी आईडी के माध्यम से वेतन भुगतान कर सरकारी राशि का गबन किया गया। क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष कुमार गुप्ता ने स्थापना शाखा के लिपिक जफर अली को निलंबित तो कर दिया है, लेकिन महकमे के भीतर एक बड़ा सवाल तैर रहा है क्या जफर सच में दोषी हैं या उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है? सूत्रों के मुताबिक, जफर अली को यह भनक तक नहीं थी कि उनके नाम पर कोई ‘मेकर आईडी’ चल रही है। आरोप है कि ऑपरेटर अविनाश राज ने 29 मार्च 2026 को बैक डेट में जाकर ‘तनुश्री’ नाम की एक काल्पनिक शिक्षिका की ऑनबोर्डिंग की। अब सबसे बड़ा रहस्य यह है कि अगर जफर अंजान थे, तो किसके इशारे पर उनकी आईडी बनाई गई? तत्कालीन डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी पर ‘प्रपत्र क’ गठित होने के बाद अब असली मास्टरमाइंड की तलाश तेज हो गई है।
इसके साथ ही मुख्यालय के कड़े रुख के बाद तत्कालीन डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी के खिलाफ ‘प्रपत्र क’ गठित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में अब तक जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार सहित दो बड़े अधिकारी सस्पेंड हो चुके हैं, जबकि जालसाज ऑपरेटर जेल की सलाखों के पीछे है। विभाग ने साफ कर दिया है कि मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली में सेंध लगाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फरार लिपिक शिशिर झा की गिरफ्तारी के लिए भी दबाव बढ़ा दिया गया है।