नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो दिनबंधु साहू नेतृत्व में शोध दल ने नए अध्ययन में यमुना किनारे उगाई जाने वाली सब्जियों में खतरनाक भारी धातु,प्रदूषण और कैंसर के जोखिम का खुलासा किया है। अध्ययन में बिना उपचार किए गए अपशिष्ट जल से सिंचाई के कारण स्थानीय स्तर पर उत्पादित सब्जियों के सेवन से गैर-कैंसरकारी तथा कैंसरकारी स्वास्थ्य जोखिम सामने आए हैं।
अध्ययन के अनुसार, दिल्ली के आसपास के पेरी-अर्बन क्षेत्रों में अनेक किसान सिंचाई के लिए प्रदूषित यमुना जल पर निर्भर हैं। इसके परिणामस्वरूप मोलिब्डेनम, एल्युमिनियम, जिंक, निकेल, क्रोमियम, कैडमियम और सीसा जैसी खतरनाक भारी धातुएं कृषि मिट्टी और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रही हैं। अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों में जो बातें सामने आर्इं हैं उनमें निकेल का स्तर प्याज में निर्धारित सीमा से 65 गुना और पालक में 97 गुना अधिक पाया गया। क्रोमियम का स्तर सफेद मूली में 11 गुना, पालक में 12 गुना और सरसों में 22 गुना अधिक पाया गया।
लाल मूली में मोलिब्डेनम का स्तर 340.06 मिलि ग्राम प्रति किलो तक और क्रोमियम का स्तर 36.58 मिलि ग्राम प्रति किलो तक पाया गया। मेथी में जिंक का स्तर 177.72 मिलि ग्राम प्रति किलो तक दर्ज किया गया। धनिया में निकेल और कैडमियम का संचय पाया गया। इस परेशानी को लेकर प्रो साहू ने कहा है कि प्रदूषण-प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी और फसलों की निरंतर सरकारी निगरानी तथा नदी के श्रोत पर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का कड़ाई से अनुपालन समय की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि शोध दल के शोधार्थियों में धर्मेंद्र कुमार, संजुक्ता साहू और शिवांकर अग्रवाल वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण अभियांत्रिकी और माइक्रोबायोम अनुसंधान जैसे विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ लाते हुए इस बहुआयामी अध्ययन को पूरा किया।