नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिले मदनपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किमी दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बेरी शिक्षा के क्षेत्र में 100 वर्ष पुरानी विरासत रखती है। बता दें कि यहां 1926 में इंग्लिश प्राइमरी विद्यालय और 1939 में हाई स्कूल स्थापित किया गया था। उस समय पूरे राज्य में आठवीं का बोर्ड हुआ करता था। बेरी उस दौर में केवल मदनपुर ही नहीं बल्कि औरंगाबाद के रफीगंज के अलावा गयाजी जिले के गुरुआ, आमस प्रखंड के छात्र-छात्राओं के लिए भी पढ़ाई का सबसे बड़ा केंद्र थी। यहां दूर-दराज से बच्चे पढ़ने आते थे और उनके लिए छात्रावास की भी व्यवस्था थी।
आजादी से पूर्व स्थापित प्राइमरी स्कूल का भवन आज भी मौजूद है, जो अपग्रेड होकर अब राजकीय मध्य विद्यालय के रूप में संचालित है। जानकारी के अनुसार मिडिल स्कूल लगभग दो एकड़ में फैला है जबकि हाई स्कूल के पास 22 एकड़ से अधिक जमीन है परंतु समय के साथ विकास की गाड़ी यहां धीमी पड़ गई। जिसके कारण शिक्षा के क्षेत्र में आपेक्षित विकास नहीं हो सका। वहीं छात्रावास की पुरानी भवन कुछ वर्ष पहले तक खंडहर में तब्दील थी। जिसे पांच से दस वर्ष पूर्व तोड़कर उसकी जगह पर मॉडल विद्यालय का निर्माण किया गया। इससे शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद जगी थी परंतु उच्च शिक्षा की व्यवस्था अब भी उपलब्ध नहीं हो सकी।
बताया जाता है कि शिक्षा के साथ-साथ बेरी धार्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पंचायत में मदाड़ नदी के तट पर स्थित भूरहा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर तक पक्की सड़क बनी हुई है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। मंदिर के सामने एक बहुत प्राचीन तालाब है जहां वर्षों से छठ पूजा का आयोजन होता आ रहा है। स्थानीय लोगों की इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। दूर-दराज से लोग यहां मन्नत मांगने आते हैं परंतु धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंदिर परिसर में बैठने, शौचालय और प्रकाश की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
स्थानीय ग्रामीण गोलू सिंह, सोनू सिंह, मिंटू कुमार सहित ने बताया कि 100 वर्ष पहले ही बेरी शिक्षा का केंद्र बन चुकी थी परंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इस विरासत को आगे नहीं बढ़ाया। पंचायत के अंदरूनी इलाकों में आज भी पक्की नाली, बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। बरसात में गांव की संपर्क सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं।