नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। श्रम अधीक्षक, औरंगाबाद अंजू कुमारी के द्वारा गठित धावा दल द्वारा को जिले के देव प्रखंड अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान बाल श्रम में नियोजित कुल 5 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया।
निरीक्षण के क्रम में बालूगंज, ढिबरा स्थित मेहता मिष्ठान भंडार एवं केक स्टोर से 2 बाल श्रमिकों, कान्हा स्वीट्स से 2 बाल श्रमिकों तथा मनपसंद होटल से 1 बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया। विमुक्त कराए गए प्रत्येक बाल श्रमिक को तत्काल सहायता के रूप में 3,000 की राशि प्रदान की गई। इसके पश्चात सभी विमुक्त बाल श्रमिकों को आवश्यक कार्रवाई एवं संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। वहीं, बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले दोषी नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के अंतर्गत बाल श्रमिकों को नियोजित करना दंडनीय अपराध है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दोषी नियोजकों को 6 माह से 2 वर्ष तक के कारावास एवं 20,000 से 50,000 तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में दोषी नियोजकों से 20,000 की राशि जिला बाल कल्याण एवं पुनर्वास कोष में जमा कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
श्रम अधीक्षक अंजू कुमारी ने बताया कि देव प्रखंड में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर लगातार धावा दल का संचालन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर बाल श्रम की पहचान, बाल श्रमिकों की विमुक्ति तथा दोषी नियोजकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रखंड की तीन पंचायतों को बाल श्रम मुक्त पंचायत घोषित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
धावा दल में संजीव कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, देव, रणविजय कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, कुटुम्बा, विजेंद्र कुमार सिंह, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, नवीनगर, रोहित कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, ओबरा तथा नरेश कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बारुण सहित संबंधित थाना के पुलिस बल के सदस्य शामिल थे।
जिला प्रशासन एवं श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम उन्मूलन के लिए अभियान निरंतर जारी रखा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर उनके संरक्षण, पुनर्वास एवं शिक्षा से जोड़ना तथा बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।