नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
बांका। कानून के लंबे हाथ जब खुद कानून के रखवालों के गिरेबान तक पहुंचें, तो सिस्टम की कलई खुल जाती है। बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड में कुछ ऐसा ही हुआ। महज 24 घंटे पहले जो प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित प्रताप सिंह एक पूर्व मुखिया को जेल की हवा खिलाकर चर्चा में आए थे, अगले ही दिन खुद निगरानी ब्यूरो के शिकंजे में फंस गए। सवाल यह उठता है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक औपचारिकता है या इसके पीछे भ्रष्टाचार की कोई गहरी परतें हैं?
बिहार राज्य के बांका जिले के फुल्लीडूमर प्रखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई की है। प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित प्रताप सिंह को 75 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि ठीक एक दिन पहले ही इस बीडीओ ने एक पूर्व मुखिया को जेल भिजवाया था, लेकिन अगले ही दिन वह खुद भ्रष्टाचार के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंच गए।
फुल्लीडूमर प्रखंड के प्रमुख पंचायत समिति गौतम प्रकाश ने 5 जनवरी 2026 को निगरानी ब्यूरो में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि पंचायत में लगभग 70 से 75 लाख रुपये की 26 विभिन्न विकास योजनाएं चलनी थीं। इन योजनाओं को पास करने के एवज में बीडीओ साहब 5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे थे। लगातार अनदेखी और प्रताड़ना से परेशान होकर पंचायत समिति ने निगरानी विभाग का दरवाजा खटखटाया। योजनाबद्ध तरीके से मंगलवार की सुबह निगरानी टीम ने आरोपी के आवास पर छापेमारी कर बीडीओ और उनके मामा को रंगेहाथ दबोच लिया।
आखिर क्यों एक जनप्रतिनिधि को महीनों तक ब्लॉक के चक्कर काटने पड़े और न्याय के लिए एंटी-करप्शन विंग का सहारा लेना पड़ा? क्या बिना कमीशन दिए ग्रामीण स्तर पर विकास कार्य होना असंभव हो गया है? यह गिरफ्तारी सिर्फ एक अधिकारी का पकड़ा जाना भर नहीं है, बल्कि यह पंचायती राज व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। जब जनता के विकास के लिए आने वाला पैसा इस तरह ‘कमीशनखोरी’ की भेंट चढ़ेगा, तो जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं का क्या हश्र होगा?