– छठ पर बिहार जाने की ‘जंग’: टिकट के लिए मारामारी, पटरी पर सिर्फ लाचारी
बेताब अहमद
पटना, बिहार। “घाट पर गूंजने वाले पारंपरिक लोकगीतों की मिठास, डूबते-उगते सूर्य को अर्घ्य देने की आस और माँ के हाथों का ठेकुआ… इन एहसासों के साथ हर परदेसी का दिल हर साल इस मौसम में सिर्फ एक ही रट लगाता है इस बार घर जाना है। लेकिन महानगरों की चकाचौंध में अपनों से दूर रोजी-रोटी की तलाश में जुटे लाखों प्रवासियों के लिए महापर्व छठ पर घर वापसी का यह सफर अब उम्मीद से ज्यादा आंसुओं और बेचैनी का बन चुका है। त्योहार से 60 दिन पहले जैसे ही रेलवे की रिजर्वेशन टिकट काउंटर खुलीं खुलते ही उम्मीदों पर फिरा पानी। रेलवे की रिजर्वेशन टिकट काउंटर खुलीं, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से बिहार आने वाली नियमित ट्रेनों की सीटें पलक झपकते ही फुल हो गईं। स्थिति यह है कि अब प्रमुख ट्रेनों में सीटें पूरी तरह समाप्त का बोर्ड लग चुका है। दशहरा, दीपावली और छठ के आने में अभी वक्त है, लेकिन परदेसियों की नींद अभी से उड़ चुकी है।
दिल्ली-मुंबई रूट पर इस वक्त करीब 70,000 यात्री वेटिंग टिकट के सहारे अपनी किस्मत आजमाने को मजबूर हैं। जेब में टिकट का टुकड़ा है, पर कन्फर्मेशन का ठिकाना नहीं। दिल में घर लौटने की ज़िद है, लेकिन सिस्टम की लाचारी रोक रही है। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई की फैक्ट्रियों, दफ्तरों व गलियों में पसीना बहाने वाले ये मध्यमवर्गीय कर्मचारी और प्रवासी मजदूर हर साल अपनों के बीच पहुंचकर छठ मनाने का सपना देखते हैं, पर मौजूदा हालात उनकी उम्मीदों को तोड़ रहे हैं। क्योंकि नियमित ट्रेनों की स्थिति देखें तो संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में 12 से 15 नवंबर तक टिकट उपलब्ध नहीं है। अमृत भारत में 10 और 15 नवंबर को टिकट नहीं है, जबकि 16 नवंबर के बाद वेटिंग की स्थिति है। 15657 ब्रह्मपुत्र मेल में नो रूम बताया गया है। 12488 सीमांचल एक्सप्रेस में 16 नवंबर तक टिकट उपलब्ध नहीं है। 12368 ट्रेन में 15 नवंबर तक और 22406 गरीब रथ एक्सप्रेस में 14 नवंबर को टिकट नहीं है। इससे दिल्ली से बिहार आने वाले यात्रियों के सामने सीमित विकल्प रह गए हैं।

छठ के बाद दिल्ली लौटने वाले यात्रियों के लिए भी टिकट का संकट बना हुआ है। 15483 महानंदा एक्सप्रेस में 18 नवंबर तक टिकट उपलब्ध नहीं है। 15743 फरक्का एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल और 12367 विक्रमशिला एक्सप्रेस में भी 16 नवंबर तक टिकट नहीं होने की स्थिति बतायी गयी है। पटना जंक्शन से दिल्ली रूट पर आने-जाने वाली 32 ट्रेनें हैं। इस मार्ग पर रोज करीब 60 हजार यात्री सफर करते हैं। 12 से 15 नवंबर के बीच करीब 4.03 लाख से 4.20 लाख यात्रियों का आरक्षण हुआ है। एक सप्ताह में करीब 70 हजार यात्रियों ने वेटिंग टिकट भी लिया है। जानकारों का मानना है कि त्योहार के दिनों में दिल्ली-मुंबई समेत अन्य महानगरों से करीब 3 लाख लोग बिहार का रुख करते हैं। अकेले नियमित ट्रेनों के बूते इस भारी-भरकम जनसैलाब को संभालना नामुमकिन है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और सूबे के अन्य कोनों तक लोगों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए कम से कम 125 से अधिक स्पेशल या अतिरिक्त ट्रेनों की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आएगा, यह भीड़ और वेटिंग लिस्ट का यह आंकड़ा विकराल रूप लेता जाएगा।
परदेसियों की आंखें अब रेलवे के उनरफ़्त ऐलानों और स्पेशल ट्रेनों की आस में टिकी हैं, ताकि वे समय पर अपने गाँव, अपने परिवार और अपनी मिट्टी की खुशबू के बीच पहुँच सकें।