सूर्यनगरी देव में लोक आस्था के महापर्व की तैयारी, भगवान भास्कर के दर्शन और अर्घ्य अर्पित करने देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं श्रद्धालु
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिले की ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी देव एक बार फिर लोक आस्था के महापर्व छठ के स्वागत के लिए तैयार हो रही है। आगामी 13 नवंबर से छठ पर्व के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने की संभावना है। सूर्य उपासना के लिए देश भर में प्रसिद्ध देव सूर्यधाम में छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। यहां आस्था, विश्वास, परंपरा और अध्यात्म का ऐसा संगम दिखाई देता है, जो देव को बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में विशिष्ट पहचान दिलाता है। छठ पर्व के अवसर पर देव की धरती सूर्य भक्ति में सराबोर हो जाती है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में व्रती पूरी निष्ठा, पवित्रता और नियम-संयम के साथ भगवान सूर्य की उपासना करते हैं। अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा इस पर्व को विशेष बनाती है।
देव में छठ मनाने का धार्मिक महत्व और यहां स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर की मान्यता श्रद्धालुओं को दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर्षित करती है। प्राचीन सूर्य मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की स्थापत्य शैली, धार्मिक मान्यताएं और सूर्योपासना की परंपरा इसे विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि छठ के अवसर पर देव में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में देव सूर्यधाम का विशेष स्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल छठ पूजा ही नहीं करते, बल्कि भगवान भास्कर के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना भी करते हैं। अनेक श्रद्धालु इस पावन अवसर पर परिवार सहित देव पहुंचते हैं और सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
चार दिनों तक गूंजेगी छठी मैया की महिमा
छठ पर्व की प्रमुख तिथियां – 13 नवंबर शुक्रवार को नहाय-खाय, 14 नवंबर शनिवार को खरना, 15 नवंबर रविवार को संध्या अर्घ्य एवं 16 नवंबर सोमवार को उषा अर्घ्य और पारण। छठ महापर्व की शुरुआत आगामी 13 नवंबर से नहाय-खाय से होती है। इसके बाद खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और अंतिम दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं। छठ गीतों की मधुर धुन, पूजा सामग्री से सजे बाजार और श्रद्धालुओं की चहल-पहल से देव का वातावरण भक्तिमय हो उठता है। छठ पर्व की सबसे बड़ी विशेषता प्रकृति के प्रति सम्मान और सूर्य की उपासना है। इस पर्व में स्वच्छता, पवित्रता, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया जाता है। जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति के भेद से ऊपर उठकर लोग इस देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचते हैं श्रद्धालु।
छठ के दौरान देव में बिहार के विभिन्न जिलों के साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा रही है। कई परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से छठ के अवसर पर देव आकर भगवान सूर्य के दर्शन करते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार की परंपरा और आस्था से जुड़ा भावनात्मक अवसर भी है। छठ के मौके पर देव की धार्मिक महत्ता के साथ स्थानीय बाजार, होटल, परिवहन और छोटे कारोबारियों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। फूल, फल, नारियल, सूप, दउरा और पूजा सामग्री की मांग बढ़ने से स्थानीय व्यवसाय को गति मिलती है। पर्व के दौरान स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के अवसर भी मिलते हैं।
व्यवस्था और सुरक्षा पर रहेगी सबकी नजर
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी। मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुविधा के लिए उचित इंतजाम श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बना सकते हैं। भीड़भाड़ के दौरान वाहनों के प्रवेश और पार्किंग की व्यवस्था, जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग तथा पुलिस बल की तैनाती भी अहम होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन, मंदिर प्रबंधन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। हालांकि, इन व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की ओर से घोषित आधिकारिक तैयारियों की जानकारी उपलब्ध होने पर उसे अलग से शामिल किया जा सकती है। जिला प्रशासन की ओर से मेले में 24 घंटे पेयजल और सात एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। प्रमुख मार्गों की मरम्मत, आवागमन, प्रकाश, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं।