नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पूर्णिया। बिहार राज्य के पूर्णिया पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने करीब 4 करोड़ रुपए की 2 किलो 130.90 ग्राम स्मैक बरामद करते हुए छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। चार महिलाओं की संलिप्तता यह दर्शाती है कि कानून की नजरों से बचने के लिए अब महिलाओं को कोरियर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।पूर्णिया पुलिस ने नशा तस्करों के एक शातिर खेल का पर्दाफाश किया है। तस्कर पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए बेहद चालाकी भरा तरीका अपना रहे थे।
अपर पुलिस अधीक्षक आलोक रंजन ने प्रेसवार्ता कर कार्रवाई की जानकारी दी उन्होंने बताया कि एसएसपी डॉ. शौर्य सुमन के निर्देश पर पुलिस की विशेष टीम नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी। पुलिस और दंडाधिकारी की विशेष टीम ने रूपौली-टीकापट्टी मुख्य मार्ग पर तीनटंगा मोड़ के पास वाहन जांच शुरू की थी। इसी दौरान रूपौली-टीकापट्टी मार्ग पर तीनटंगा मोड़ के पास पुलिस ने एक सफेद किआ कार (BR-11BX-7042) को रोका। कार के भीतर चार महिलाएं और दो पुरुष सवार थे। तस्कर सोचते थे कि महिलाओं के होने पर पुलिस शक नहीं करेगी। तलाशी लेने पर कार से 2 किलो 130.90 ग्राम स्मैक बरामद हुई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करीब 4 करोड़ रुपए आंकी गई है। पुलिस ने मौके से 6 लोगों को दबोचा जिसमें 2 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल। पुलिस महानिरीक्षक/अधीक्षक कार्यालय के निर्देशानुसार, मादक पदार्थ विरोधी अभियान के तहत एक कार चालक विष्णु कुमार समेत चार महिला आरोपि शांति देवी, शोभा देवी, इंदु देवी, मीणा देवी और एक पूर्व आदतन अपराधी शेखर कुमार को गिरफ्तार किया गया है। रूपौली के रहने वाले शेखर कुमार को इस अवैध धंधा का मुख्य सरगना बताया गया है।
स्मैक के अलावा 40,260 रुपए नकद, 6 मोबाइल फोन और तस्करी में प्रयुक्त किआ कार जब्त की गई। अपर पुलिस अधीक्षक आलोक रंजन और एसएसपी डॉ. शौर्य सुमन के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि पश्चिम बंगाल से लाई जा रही इस खेप को आगे कहां सप्लाई किया जाना था। इस गिरोह के बाकी संपर्कों को खंगालने के लिए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ जारी है।
मौके से जब्त मोबाइल उपकरणों के प्रारंभिक विश्लेषण में संदिग्ध बैंक लेन-देन और बड़ी रकम के आदान-प्रदान के साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर मामले की तहकीकात कर रही पुलिस के हाथ शुरुआती डिजिटल फॉरेंसिक जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन के सबूत लगे हैं। यह साफ है कि यह महज एक खेप की बरामदगी नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल से बिहार के सीमांचल तक फैले एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है। मुख्य आरोपी शेखर कुमार का पुराना आपराधिक इतिहास इस बात की पुष्टि करता है कि एनडीपीएस कानूनों के बावजूद पुराने अपराधी नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने में कामयाब हो रहे हैं।