राजकीय मध्य विद्यालय हाता में है मात्र छह कमरे
उपेंद्र कश्यप
दाउदनगर (औरंगाबाद)। 1885 में बने नगर पालिका दाउदनगर में पीढ़ियों को शिक्षित करने के लिए कई विद्यालय बनाए गए थे। जिसमें एक राजकीय मध्य विद्यालय हाता भी है। यह वार्ड संख्या दो में स्थित है। तब भूमिदाता समेत समाज के अन्य लोगों ने शायद यह कल्पना नहीं की होगी कि एक समय ऐसा भी आएगा जब यह जमीन छोटी पड़ जाएगी।
पढ़ने वालों की संख्या इतनी अधिक हो जाएगी कि सबको कक्षावार बिठाकर पढ़ने के लिए यह विद्यालय छोटा पड़ जाएगा। मात्र चार डिसमिल में दो मंजिला यह विद्यालय भवन बना है। जिसमें छह कमरे हैं। जिसमें से एक कमरा कार्यालय के लिए इस्तेमाल होता है। शेष बचे पांच कमरों में ही कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। अब इसमें स्थिति यह है कि कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों को एक कमरे में तथा तीन और चार के विद्यार्थियों को एक साथ एक कमरे में बिठाया जाता है और उन्हें पढ़ाया जाता है।
समझिये कि इन्हें पढ़ाना शिक्षकों के लिए और खुद इनको पढ़ने में कितनी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। इस तरह जब दो कक्षा के बच्चे एक साथ पढ़ रहे होते हैं तो वे क्या समझ सकेंगे और क्या नहीं समझ सकेंगे, और कितना समझ सकेंगे, यह समझना बड़ा मुश्किल का काम है। प्रधानाध्यापक रविंद्र नाथ टैगोर बताते हैं कि एक प्रधानाध्यापक समेत कुल सात शिक्षक हैं और कमरों के अभाव के कारण ऐसा करना उनके लिए आवश्यक विवशता है।

रविंद्र नाथ टैगोर प्रधानाध्यापक रवींद्रनाथ टैगोर बताते हैं कि उनके पास लगभग पचास हजार की राशि विकास कार्य के लिए उपलब्ध है। इससे कार्यालय के छत की ढलाई करेंगे। यह कमरा काफी जर्जर हो गया है। इसके अलावा जमीन पर पत्थर लगाना उनका लक्ष्य है ताकि कम जगह में भी अधिक बेहतर विद्यालय को बनाया जा सके।