– बिट्टू ने बिना किसी सरकारी मदद के अकेले ही अजनार नदी की सफाई शुरू की थी
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
भोपाल। अकेले दम पर राजगढ़ जिले की अजनार नदी साफ करने वाले 21 वर्षीय युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही की किस्मत पलट गई है। अपनी मेहनत और पक्के इरादे से अजनार नदी की तस्वीर बदलने वाले बिट्टू से अब खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात की है। मुख्यमंत्री ने उनके इस अनूठे और सराहनीय प्रयास की खुले दिल से प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है।
सीएम ने की बिट्टू के जज्बे की तारीफ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात के दौरान कहा कि बिना किसी बड़े सरकारी तंत्र और संसाधनों के, केवल अपनी इच्छाशक्ति के दम पर एक दूषित हो चुकी नदी का स्वरूप बदल देना अपने आप में एक अनोखी मिसाल है। सीएम ने राज्य सरकार का जल संरक्षण का विज़न साझा करते हुए कहा कि बिट्टू तबाही जैसे समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण में जुटे युवाओं को सरकार हमेशा प्रोत्साहित करेगी और उन्हें आगे भी हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के संरक्षण के लिए हरसंभव सरकारी मदद का आश्वासन दिया है।
जिस उम्र में युवा अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, उस उम्र में बीएससी के छात्र बिट्टू ने वह कर दिखाया जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। ब्यावरा में रहने वाले बिट्टू अक्सर नदी के पास स्थित मंदिर जाया करते थे, जहां नदी की गंदगी देखकर उनके मन में एक गहरी टीस उठती थी। इसके बाद उन्होंने गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को ब्यावरा में बहने वाली प्रदूषित अजनार नदी की सफाई का बीड़ा अकेले ही उठा लिया। शुरुआत में उनके पास कोई बड़ा बजट या मशीनरी नहीं थी, बस एक फावड़ा और मजबूत इरादा था।
शुरुआत में बिट्टू अकेले ही इस काम में जुटे रहे क्योंकि नदी की हालत इतनी खराब थी कि किसी को विश्वास नहीं था कि कोई अकेला युवा इसे साफ कर सकता है। हालांकि, जब उन्होंने नदी की ‘पहले और बाद’ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं, तो वे तेजी से वायरल हो गईं। उनके काम की चर्चा जब पूरे इलाके में हुई, तो स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका भी मदद के लिए आगे आ गई। ब्यावरा नगर निगम ने जमे हुए कचरे और पॉलीथीन को हटाने के लिए जेसीबी और पोकलेन मशीनें लगाकर बिट्टू के इस प्रयास को बड़ा समर्थन दिया।
एएनआई को दिए इंटरव्यू में बिट्टू ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में कचरा साफ करने के लिए खुद एक मशीन बनाने की सोची थी, लेकिन बजट की कमी के कारण वह संभव नहीं हो पाया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज उनकी इस पहल ने न सिर्फ ब्यावरा की अजनार नदी को नया जीवन दिया है, बल्कि पूरे देश के युवाओं के सामने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो एक अकेला इंसान भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।