नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। सिविल कोर्ट में बम की झूठी धमकी से ठप हुआ कामकाज, वकीलों में रोष एक बार फिर न्याय के पहरेदारों और आम जनता की सांसें थम गईं। शुक्रवार की सुबह जब पटना सिविल कोर्ट का मुख्य गेट खुला, तो हमेशा की तरह न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों की भीड़ होनी चाहिए थी, लेकिन उसकी जगह वहां पुलिस के सायरन और सुरक्षाबलों की भारी तैनाती ने गूंज ले ली। कारण था एक बार फिर आया वह डरावना ईमेल, जिसमें अदालत को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी।
धमकी की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। बिना एक पल गंवाए ‘सुरक्षा सर्वोपरि’ के सिद्धांत पर काम करते हुए पूरे न्यायिक परिसर को खाली कराने का फरमान जारी हुआ। मुख्य द्वार पर ताले लटक गए और न्यायिक कार्यवाही को बीच में ही रोक दिया गया। हताश होकर अधिवक्ताओं और मुवक्किलों को बाहर आना पड़ा। मौके पर पहुंची पीरबहोर थाना पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड ने मोर्चा संभाल लिया। कोर्ट के चप्पे-चप्पे, हर एक कमरे, पार्किंग स्थल और आसपास के कोने-कोने की सघन तलाशी ली गई। गनीमत यह रही कि घंटों चली इस मशक्कत के बाद भी अब तक किसी भी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यह सिर्फ एक अफवाह या शरारत थी।
यह कोई पहली बार नहीं है जब पटना की अदालतों को इस तरह के आतंक का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले जनवरी 2024 में पटना हाईकोर्ट को भी इसी तरह का धमकी भरा ईमेल मिला था। बार-बार इस प्रकार की झूठी धमकियों के मिलने से जहां एक ओर सुरक्षा एजेंसियां तनाव में हैं, वहीं दूसरी ओर न्याय की आस में तारीख पर आने वाले लोगों और वकीलों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। वकीलों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि बार-बार ऐसी हरकतें करने वाले असामाजिक तत्व कानून की पकड़ से दूर क्यों हैं।फिलहाल, एहतियात के तौर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और साइबर सेल यह पता लगाने में जुट गया है कि आखिर यह दहशत भरा संदेश भेजने वाला शातिर दिमाग कौन था।
सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल की टीमें तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर यह फर्जी संदेश कहां से और किस मानसिकता के तहत भेजे जा रहे हैं। एहतियात के तौर पर परिसर को खाली कराकर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। वकीलों का कहना है कि प्रशासन को इस प्रकार की अफवाह फैलाने वाले शरारती तत्वों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चल सके।