हर बार टूटती रही है मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी का सपना
उपेंद्र कश्यप
दाउदनगर (औरंगाबाद)। वर्ष 2005 में दूसरी बार अक्टूबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक भाजपा और जदयू की नौ बार सरकार बन चुकी है। प्रायः हर बार यह उम्मीद रही कि औरंगाबाद जिला को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी मिलेगी। लेकिन 21 साल में मात्र 22 महीने की हिस्सेदारी से ही “मंत्री-सुख” औरंगाबाद जिला के नाम अंकित है। इस बार भी ऐसी उम्मीद थी कि जब औरंगाबाद जिले के छह में पांच विधायक एनडीए से हैं तो शायद जिले की भागीदारी भी हो। लेकिन ऐसा न हो सका। वर्ष 2005 में जदयू भाजपा को तीन, राजद को दो और तब अलग चुनाव लड़ी लोक जनशक्ति पार्टी को एक विधायक मिला था। तब भी सरकार में औरंगाबाद जिले को हिस्सेदारी नहीं मिली।
वर्ष 2010 में जिले के मतदाताओं ने जदयू व भाजपा के खाते में पांच और निर्दलीय को एक सीट दिया, तो उम्मीद फिर जगी कि बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में किसी को जगह मिलेगी। तब औरंगाबाद से भाजपा के विधायक रामाधर सिंह बिहार सरकार में सहकारिता मंत्री बनाए गए। लेकिन विवादों की वजह से वह मात्र 22 महीना ही मंत्री रह सके। सिर्फ 26 अगस्त 2011 से 16 जून 2013 यानी लगभग 22 माह। तब से लेकर आज तक औरंगाबाद जिले के किसी भी विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। वर्ष 2015 में जब नीतीश कुमार राजद के साथ चले गए तो, औरंगाबाद में मात्र दो विधायक भाजपा जदयू से जीते और महा गठबंधन को चार विधायक मिले।
वर्ष 2020 में जब चुनाव हुआ तो औरंगाबाद जिला से एनडीए का सुपड़ा साफ हो गया। सभी छह सीट राजद और कांग्रेस के खाते में गए। तब औरंगाबाद के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल करने का प्रश्न ही नहीं था। जब 2025 में विधान सभा का चुनाव हुआ, तो इस जिले में एनडीए को पांच और महागठबंधन को मात्र एक विधायक मिला। जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उम्मीद की गई कि इस बार हिस्सेदारी मिलेगी। तब भी निराशा हाथ लगी। और अब जब सात मई 2026 को एनडीए की सरकार चला रहे सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तब भी कोई हिस्सेदारी नहीं मिली। इस 26 साल में जदयू के हाथ से सत्ता भले ही भाजपा के हाथ चली गई, लेकिन मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी का सपना अधूरा ही रह गया।
अंत में एक सवाल:-
नए मंत्रिमंडल विस्तार से एक सवाल उठता है कि क्या औरंगाबाद जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की राजनीतिक विवशता लायक नहीं है, जो इसकी आकांक्षा पूरी नहीं होती। सवाल इसलिए कि मंत्रिमंडल गठन में हर बार यह तर्क दिया जाता है कि जाति और क्षेत्र का ख्याल रखा जाता है।
औरंगाबाद जिले में एनडीए के विधायक:-
ओबरा से लोजपा आर के डॉ. प्रकाशचंद्र, औरंगाबाद से भाजपा के त्रिविक्रम नारायण सिंह, नबीनगर से जदयू से चेतन आनंद, रफीगंज से जदयू के प्रमोद कुमार सिंह और कुटुंबा सुरक्षित से हम के ललन राम।