बेताब अहमद
रोहतास/गोपालगंज। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग (विजिलेंस) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। लोकसेवकों द्वारा काली कमाई जमा करने के मामलों में निगरानी विभाग लगातार एक्शन मोड में है। करगहर का ठोड़सन पूर्वी गांव शुक्रवार को अचानक चर्चा में आ गया। वजह थी गांव के लाल और गोपालगंज के एडीएम राजेश्वरी पांडेय के घर निगरानी विभाग की टीम का पहुंचना। ताजा मामला गोपालगंज के एडीएम राजेश्वरी पांडेय से जुड़ा है। गोपालगंज के एडीएम राजेश्वरी पांडेय के रोहतास स्थित पैतृक आवास पर शुक्रवार को निगरानी की टीम ने अचानक धावा बोल दिया। आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोपों के बाद हुई इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर जब डीएसपी केके गुप्ता और सुरेश राम की टीम गाड़ियों से उतरी, तो ग्रामीणों में कौतूहल और सन्नाटा पसर गया। लगभग दो घंटे तक अधिकारी घर के भीतर फाइलों को खंगालते रहे। डीएसपी केके गुप्ता और सुरेश राम की अगुवाई में चली दो घंटे की इस गुप्त कार्रवाई में कई अहम दस्तावेज खंगाले गए हैं।

राजेश्वरी पांडेय के चार ठिकानों पर शुक्रवार को एक साथ छापेमारी की गई। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के दौरान करीब 2.50 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध संपत्ति का खुलासा होने की जानकारी सामने आई है। एसवीयू के अनुसार, यह संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से 135.23 प्रतिशत अधिक बताई गई है। तलाशी के दौरान 12 अचल संपत्तियों, 35 बैंक खातों में जमा करीब 1.49 करोड़ रुपये, 32 लाख रुपये के जेवर, 8.50 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट और 1.85 लाख रुपये नकद से संबंधित जानकारी मिली है। इसके अलावा, विभिन्न कंपनियों के शेयरों और म्यूचुअल फंड में निवेश के दस्तावेज भी मिले हैं। जांच एजेंसी को संपत्तियों की खरीद, महंगी वस्तुओं और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई कागजात हाथ लगे हैं।
एसवीयू की यह कार्रवाई पटना, गोपालगंज और रोहतास जिले में की गई। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी में मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। बरामद सामग्री और संपत्तियों के वास्तविक मूल्य का आकलन जांच के आगे बढ़ने के साथ किया जाएग। विशेष निगरानी इकाई ने राजेश्वरी पांडेय के चार ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इनमें पटना स्थित उनका आवास, गोपालगंज समाहरणालय स्थित कार्यालय, गोपालगंज में सरकारी आवास और रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के ठोरसन गांव स्थित पैतृक तथा उनके स्तर से निर्मित मकान शामिल हैं।
पटना में रूपसपुर थाना क्षेत्र के आरपीएस स्कूल के पास भवानी सिटी अपार्टमेंट स्थित फ्लैट नंबर 206 में तलाशी ली गई। इस दौरान नकदी, जेवर और महंगी वस्तुओं की खरीद से संबंधित बिल-वाउचर बरामद होने की जानकारी दी गई है। गोपालगंज स्थित कार्यालय और सरकारी आवास के साथ रोहतास के ठोरसन गांव में भी दस्तावेजों की जांच की गई। अन्य ठिकानों से मिले कागजात की भी पड़ताल जारी है। एसवीयू के अनुसार, पटना स्थित आवास की तलाशी के दौरान करीब 1.85 लाख रुपये नकद और लगभग 32 लाख रुपये मूल्य के जेवर मिले हैं। इसके साथ ही कई महंगी वस्तुओं की खरीद से संबंधित बिल और वाउचर भी बरामद किए गए हैं
तलाशी के दौरान 8.50 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े दस्तावेज मिलने की भी जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के आधार पर निवेश के स्रोत और संपत्ति अर्जित करने में खर्च की गई राशि का सत्यापन कर रही है। जांच के दौरान चार अलग-अलग बैंकों में कुल 35 बैंक खातों का पता चला है। एसवीयू की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन खातों में कुल 1,49,17,400 रुपये जमा हैं। एजेंसी इन खातों के लेनदेन, जमा राशि के स्रोत और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।
एसवीयू के विवरण में बैंक खातों की जमा राशि, अचल संपत्तियों और अन्य निवेशों से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की संपत्ति का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आवास से मिले दस्तावेजों के आधार पर 3,12,47,400 रुपये की संपत्ति संबंधी जानकारी सामने आने की बात भी कही है। इस राशि और शुरुआती तौर पर बतायी गई 2.50 करोड़ रुपये से अधिक की कथित आय से अधिक संपत्ति के आकलन का अंतिम मिलान जांच के दौरान किया जाना बाकी है।
एसवीयू की जांच में राजेश्वरी पांडेय, उनकी पत्नी और पुत्र के नाम पर कुल 12 अचल संपत्तियों का पता चलने की जानकारी दी गई है। इन संपत्तियों में विभिन्न स्थानों पर खरीदे गए भूखंड और फ्लैट शामिल बताए गए हैं। इनका अनुमानित मूल्य करीब 1.32 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, पटना, रोहतास के पैतृक गांव ठोरसन और अन्य स्थानों पर संपत्तियां खरीदे जाने से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। अब इन संपत्तियों की खरीद की तारीख, भुगतान के स्रोत और संबंधित आय के विवरण का मिलान किया जा रहा है। तलाशी के दौरान विभिन्न वित्तीय संस्थानों और कंपनियों में निवेश से संबंधित दस्तावेज मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें एलआईसी, एनएसएस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस तथा अडाणी पावर, हबटाउन और हिंदुस्तान लीवर समेत अन्य कंपनियों के शेयरों का उल्लेख है। म्यूचुअल फंड में निवेश से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।
एसवीयू अब इन निवेशों की कुल राशि, निवेश के समय उपलब्ध आय और संबंधित बैंक खातों के लेनदेन की जांच करेगी। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश और संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई राशि के स्रोत क्या थे। एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सुधांशु कुमार के अनुसार, सूचना का सत्यापन कराने के बाद राजेश्वरी पांडेय के खिलाफ गुरुवार को एसवीयू थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
इसके बाद पटना स्थित निगरानी न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया. छापेमारी की जिम्मेदारी सीनियर डीएसपी लव कुमार को दी गई। उनके नेतृत्व में टीमों ने शुक्रवार को अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया इस दौरान मिले दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच जारी है। एसवीयू से मिली जानकारी के अनुसार, राजेश्वरी पांडेय ने वर्ष 2010 में सरकारी सेवा में योगदान दिया था। वह बीपीएससी की 47वीं बैच की अधिकारी बतायी गई हैं। अपने सेवाकाल में वह पूर्णिया में सीनियर डिप्टी कलेक्टर, योजना एवं विकास विभाग में ओएसडी और धमदाहा में एसडीओ समेत विभिन्न पदों पर कार्यरत रह चुकी हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सेवाकाल के दौरान ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की गई और विभिन्न वित्तीय संस्थानों में निवेश किया गया। फिलहाल, तलाशी में मिले दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति और आय का मिलान किया जा रहा है। मामले में जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।