प्रबंध निदेशक ने कहा, दो वर्षों में सभी सरकारी भवन और विद्यालय होंगे सोलर संचालित
कमल किशोर
पटना। साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक सौरभ जोरवाल ने कहा है कि बिहार में सौर ऊर्जा क्रांति की दिशा में राज्य के ढाई लाख बीपीएल एवं कम आय वाले परिवारों के घरों में एक किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र इसी वर्ष नवंबर माह तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लाभुक परिवारों से किसी प्रकार की राशि नहीं ली जाएगी, बल्कि संयंत्र स्थापना पर होने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

श्री जोरवाल ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिला प्रशासनों और विद्युत विभाग को तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य एजेंसियों का चयन कर उन्हें संबंधित जिले आवंटित कर दिए गए हैं तथा कई स्थानों पर स्थापना का कार्य शुरू भी हो चुका है। प्रबन्ध निदेशक ने बताया कि बिहार सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कई योजनाओं को एक साथ लागू कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना नहीं, बल्कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा सरकारी राजस्व की बचत सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि विभाग इस पूरी परियोजना की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल किया जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अगले दो वर्षों में सभी सरकारी भवनों और सरकारी विद्यालयों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में सोलर पावर उपकरण लगाए जाएंगे, वहीं सभी सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और अन्य सरकारी भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह पहल सरकारी संस्थानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
श्री जोरवाल के अनुसार, सरकारी भवनों और विद्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो जाने के बाद राज्य सरकार को बिजली बिल पर होने वाले भारी व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व की बचत होगी, जिसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा लागत में कमी आने से सरकारी संस्थानों का संचालन भी अधिक किफायती और पर्यावरण अनुकूल होगा।
प्रबंध निदेशक ने कहा कि बिहार में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहना भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि घर-घर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने से न केवल बिजली उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि प्रदूषण कम करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ढाई लाख घरों में लगाए जाने वाले एक किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र से गरीब और कम आय वाले परिवारों को नियमित एवं किफायती बिजली उपलब्ध होगी। इससे उनकी मासिक बिजली पर निर्भरता कम होगी तथा ऊर्जा सुरक्षा भी बढ़ेगी। सरकार द्वारा पूरी लागत वहन किए जाने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बिना किसी वित्तीय बोझ के इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
श्री जोरवाल ने स्पष्ट किया कि योजना को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए सभी जिलों में प्रशासनिक स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया है। कार्य एजेंसियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और विभागीय अधिकारी नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां-जहां कार्य प्रारंभ हो चुका है, वहां गुणवत्ता और गति दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि लाभुकों को समय पर सुविधा उपलब्ध हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में एक किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाने में सामान्यतः 45 हजार से 75 हजार रुपये तक का खर्च आता है। यह लागत सौर पैनलों के प्रकार, तकनीक तथा बैटरी की आवश्यकता के अनुसार बदलती है। बिहार सरकार द्वारा इस पूरी राशि का वहन किए जाने से यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर ढाई लाख घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो जाते हैं और अगले दो वर्षों में सभी सरकारी विद्यालय तथा सरकारी भवन भी सोलर आधारित हो जाते हैं, तो बिहार स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी वित्तीय बचत तीनों दृष्टियों से राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम मानी जा रही है।