नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। कल तक जहाँ करमा पर्व के पारंपरिक गीतों की गूंज थी, आज वहाँ सिर्फ चीखें और सन्नाटा है। औरंगाबाद जिला के कुटुंबा प्रखंड के सिंघना गांव में बुधवार की सुबह आस्था का उल्लास एक कभी न भूलने वाले दर्द में बदल गया। मंगलवार को जिन बहनों ने भाई की लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखा था, बुधवार की सुबह पूजा का ‘झूर’ विसर्जित करते समय वे काल के गाल में समाने लगीं। इस दिल दहला देने वाले हादसे में 17 वर्षीय आकांक्षा कुमारी की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि मौत के मुंह में जा चुकीं तीन अन्य बेटियों को ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया।
और वो ‘नया तालाब’ काल बन गया
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में हाल ही में एक नए तालाब की खुदाई हुई थी। चारों सहेलियाँ आकांक्षा, छाया, पायल और पुष्पांजलि पूजा संपन्न करने के बाद सुबह-सुबह विसर्जन के लिए इसी नए तालाब के तट पर पहुँची थीं। विसर्जन के बाद जब वे नहाने के लिए पानी में उतरीं, तो उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि नए खोदे गए तालाब की गहराई उनके लिए काल बन जाएगी। देखते ही देखते चारों सहेलियाँ गहरे पानी में समाने लगीं और उनकी किलकारियां चीख-पुकार में बदल गईं। मृतका की पहचान सिंघना गांव निवासी दीपक सिंह की पुत्री आकांक्षा कुमारी के रूप में हुई है। हादसे में घायल किशोरियों में राजेश सिंह की पुत्री छाया कुमारी, स्व. बबलू सिंह की पुत्री पायल कुमारी और स्व. रंजन सिंह की पुत्री पुष्पांजलि कुमारी शामिल हैं। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, चारों किशोरियों ने मंगलवार को करमा पर्व का उपवास रखा था।
देवदूत बनकर आए मुकेश, तीन को मिला जीवनदान
जब बेटियाँ डूब रही थीं, तभी वहां से गुजर रहे एक किशोर ने उनकी आवाज सुनी। उसने तुरंत रास्ते से जा रहे मुकेश सिंह को आवाज लगाई। मुकेश ने बिना एक पल गंवाए तालाब के गहरे पानी में छलांग लगा दी। अपनी जान की परवाह न करते हुए मुकेश ने एक-एक कर छाया, पायल और पुष्पांजलि को पानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन अफसोस, जब तक वे आकांक्षा तक पहुँचते, वह गहरे पानी में ओझल हो चुकी थी।

अस्पताल में चल रहा इलाज, डॉक्टरों ने कहा- हालत में सुधार
बाद में ग्रामीणों की मदद से आकांक्षा का बेजान शरीर पानी से बाहर निकाला जा सका। उसे देखते ही परिजनों की दुनिया उजड़ गई। मृतका आकांक्षा गांव के ही दीपक सिंह की बेटी थी। उधर, मुकेश की तत्परता से बचाई गईं तीनों किशोरियों को तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार, इलाज के बाद अब तीनों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। इस घटना ने पूरे सिंघना गांव को झकझोर कर रख दिया है। त्योहार के ठीक अगले दिन एक घर का चिराग बुझ जाने से हर आंख नम है और गांव के चूल्हे तक नहीं जले हैं।