– एक फोन कॉल और 30 जिंदगी दांव पर: समस्तीपुर बस हादसे ने फिर खोला ‘ड्राइविंग के दौरान मोबाइल’ का जानलेवा सच
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
समस्तीपुर। समस्तीपुर से पटना जा रही बस के चालक की एक लापरवाही ने 30 परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। एनएच-28 पर हुआ यह हादसा कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नियमों को ताक पर रखने का नतीजा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ड्राइवर लगातार मोबाइल पर व्यस्त था, जिससे बस अनियंत्रित हो गई। सामने से आ रहे ट्रक ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी को गड्ढे में भी उतारा, लेकिन बस की रफ्तार और लापरवाही के आगे उसकी कोशिश नाकाम रही। यह हादसा सबक है कि स्टीयरिंग थामे हाथ में जब मोबाइल आता है, तो सफर मौत के सफर में बदल जाता है।

सोमवार की सुबह एनएच-28 पर जब बस और ट्रक के परखच्चे उड़े, तो मुसरीघरारी के फतेहपुर गांव के स्थानीय ग्रामीण देवदूत बनकर सामने आए। पुलिस और प्रशासन के पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए क्षतिग्रस्त बस में फंसे 30 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों ने न केवल घायलों को निकाला, बल्कि बिना समय गंवाए उन्हें पास के निजी क्लीनिकों में भर्ती कराकर इलाज शुरू कराया। अगर ग्रामीण मुस्तैदी न दिखाते, तो यह हादसा किसी बड़े संताप में बदल सकता था।
समस्तीपुर-पटना बस हादसे में घायल साजन कुमार जब होश में आए, तो उन्हें चोट के दर्द से ज्यादा समाज की संवेदनहीनता ने झकझोर दिया। हादसे के बाद जहां कुछ लोग जान बचाने दौड़े, वहीं किसी ने बेहोश पड़े साजन की जेब से 15 हजार रुपये और मोबाइल साफ कर दिया। यह घटना सोचने पर मजबूर करती है कि जब लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हों, तब कोई इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है?
सड़क हादसे के बाद मुसरीघरारी थाना पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में है। हादसे में 30 लोगों के घायल होने के बाद पुलिस ने दोनों दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को तुरंत जब्त कर हाईवे पर यातायात बहाल कराया। यात्रियों द्वारा ड्राइवर के मोबाइल पर बात करने के आरोपों पर पुलिस तकनीकी (कॉल डिटेल्स) और प्रत्यक्ष रूप से गहन जांच कर रही है। इसके साथ ही, घायल यात्री से हुई चोरी के मामले को भी पुलिस ने गंभीरता से लिया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।